दिल्ली में रहने वाले गोपालकृष्णन नायर पिछले दो दशकों से ओणम सद्य के माध्यम से केरल की समृद्ध पाक परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। एक साधारण कुक से लेकर 'तामरा वेडिंग्स' के संस्थापक बनने तक का उनका सफर प्रेरणादायक है।
- गोपालकृष्णन नायर पिछले 20 वर्षों से दिल्ली-एनसीआर में पारंपरिक ओणम सद्य परोस रहे हैं।
- उनका व्यवसाय 'तामरा वेडिंग्स' अब बड़े पैमाने पर शादियों और त्योहारों के लिए कैटरिंग करता है।
- सद्य के लिए सामग्री केरल, तमिलनाडु और दिल्ली के विभिन्न बाजारों से मंगवाई जाती है।
दिल्ली की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच, गोपालकृष्णन नायर जैसे लोग केरल की मिट्टी की खुशबू और परंपराओं को जीवित रखे हुए हैं। 74 वर्षीय नायर, जो पिछले दो दशकों से दिल्ली में ओणम सद्य (Onam Sadhya) की परंपरा को बखूबी निभा रहे हैं, अब केवल एक कैटरर नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक सेतु बन चुके हैं। उनका सफर 1970 में केरल के अंगमली से दिल्ली आने के संघर्ष से शुरू हुआ था।
ओणम सद्य केवल एक भोजन नहीं है, बल्कि यह एक अनुष्ठान है। केले के पत्ते पर नमक, बनाना चिप्स, और शकरवरट्टी (Sharkara-varatti) से शुरू होकर, यह सफर विभिन्न प्रकार के अचार, पचड़ी, किचड़ी और फिर ओलन, एरिसेरी और अवियल जैसे मुख्य व्यंजनों तक जाता है। अंत में, घी और दाल के साथ चावल और मीठे पायसम (Payasam) के साथ इस दावत का समापन होता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कैसे प्रवासी समुदाय अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए भोजन का उपयोग करते हैं। गोपालकृष्णन नायर की कहानी दर्शाती है कि कैसे एक व्यक्ति अपनी सांस्कृतिक विरासत को एक सफल व्यावसायिक उद्यम में बदल सकता है, जो न केवल स्वाद बल्कि भावनाओं को भी परोसता है।
"ओणम केवल एक त्योहार नहीं है... यह एक भावना है। दुनिया के किसी भी कोने में, यदि तीन मलयाली परिवार भी साथ आते हैं, तो इसे बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है," नायर कहते हैं।
उनकी कंपनी, तामरा वेडिंग्स (Taamra Weddings), जिसे अब उनके बेटे सजीव संभालते हैं, अब दिल्ली-एनसीआर में हजारों लोगों को भोजन परोसती है। हर साल, मयूर विहार स्थित उत्तर गुरुवायप्पन मंदिर में वे हजारों लोगों के लिए सद्य तैयार करते हैं। इस विशाल कार्य के लिए सामग्री का प्रबंधन भी एक बड़ी चुनौती है; केले के पत्ते तमिलनाडु से आते हैं, जबकि चिप्स केरल के त्रिशूर और पलक्कड़ से मंगवाए जाते हैं।
नार का सफर बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। दिल्ली आने के बाद उन्होंने एक छोटे भोजनालय में काम करना शुरू किया और जल्द ही 'डोसा मास्टर' के रूप में अपनी पहचान बना ली। उस दौर में मिक्सर-ग्राइंडर नहीं थे, और उन्हें घंटों तक पत्थर पर हाथ से बैटर पीसना पड़ता था। आज, उनका व्यवसाय एक पेशेवर स्तर पर पहुँच चुका है, जहाँ वे बड़ी शादियों और संस्थागत समारोहों को संभालते हैं।
Frequently Asked Questions
1. ओणम सद्य क्या है?
यह केरल का एक पारंपरिक बहु-कोर्स भोजन है जिसे केले के पत्ते पर परोसा जाता है और ओणम त्योहार के दौरान विशेष रूप से बनाया जाता है।
2. गोपालकृष्णन नायर का व्यवसाय क्या है?
वे 'तामरा वेडिंग्स' के माध्यम से दिल्ली-एनसीआर में पारंपरिक केरल कैटरिंग सेवाएं प्रदान करते हैं।