दिल्ली अब केवल उत्तर भारतीय व्यंजनों तक सीमित नहीं है; ओणम का पारंपरिक 'सद्य' भोज अब शहर की खान-पान संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है।

  • दिल्ली में ओणम के पारंपरिक 'सद्य' भोज की लोकप्रियता में भारी वृद्धि हुई है।
  • केरल हाउस और विभिन्न रेस्टोरेंट्स में हजारों लोगों के लिए विशेष भोजन की व्यवस्था की जा रही है।
  • दक्षिण भारतीय भोजन अब केवल इडली-डोसा तक सीमित नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विविधताओं तक फैल चुका है।

दिल्ली की गलियों और रेस्टोरेंट्स में अब एक नया स्वाद घुल रहा है। साल 2014 में जब कोई केरल में ओणम का अनुभव करता था, तो वह केवल एक स्थानीय परंपरा थी। लेकिन आज, दिल्ली के खान-पान के नक्शे पर ओणम सद्य (Onam Sadhya) एक प्रमुख आकर्षण बन चुका है। केले के पत्ते पर परोसा जाने वाला यह पारंपरिक भोज अब केवल मलयाली समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली के हर खाने के शौकीन की पसंद बनता जा रहा है।

सांख्यिकीय वृद्धि और बढ़ती मांग

ओणम के प्रति दिल्ली का आकर्षण अब केवल सुनी-सुनाई बातें नहीं रह गया है, बल्कि इसके आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं। वर्ष 2025 में, नई दिल्ली स्थित केरल हाउस ने तीन दिनों के दौरान लगभग 3,000 लोगों को सद्य परोसने की योजना बनाई थी। वहीं, दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न फूड गाइड्स के अनुसार, 2026 में कम से कम 20 ऐसे रेस्टोरेंट्स की सूची है जो 20 से 30 तरह के व्यंजनों वाला विशेष ओणम सद्य परोस रहे हैं। साकेत के 'महाबेली' जैसे मशहूर रेस्टोरेंट्स में प्रतिदिन सैकड़ों उत्सव विशेष भोजन परोसे जाते हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि दिल्ली का भोजन के प्रति दृष्टिकोण अब अधिक समावेशी और गहरा हो गया है। दक्षिण भारतीय भोजन के साथ दिल्ली का रिश्ता पुराना है—चाहे वह 1991 से चल रहा आंध्र भवन हो या आरके पुरम का कर्नाटक फूड सेंटर। लेकिन अब बदलाव का स्तर बदल गया है। अब लोग केवल इडली-डोसा नहीं, बल्कि अप्पम, पुट्टू, कोथु परोट्टा और बिसी बेले बाथ जैसे जटिल और क्षेत्रीय व्यंजनों की तलाश में रहते हैं।

भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं है, बल्कि यह एक भाषा है जिसके माध्यम से समाज अपनी संस्कृति और परंपराओं को व्यक्त करता है।

सद्य की खासियत यह है कि यह किसी भी भोजन को संक्षिप्त नहीं होने देता। एक अकेला केले का पत्ता 20 से 30 अलग-अलग प्रकार के व्यंजनों, दालों, सब्जियों और पायसम का संगम होता है। यह विविधता ही इसे एक उत्सव बनाती है।

Did You Know?: ओणम सद्य में परोसे जाने वाले व्यंजनों की संख्या इतनी अधिक होती है कि इसे खाने के लिए एक विशेष क्रम और तकनीक का पालन करना पड़ता है।

Frequently Asked Questions

1. ओणम सद्य क्या है?
यह केरल का एक पारंपरिक उत्सव भोज है जिसे केले के पत्ते पर विभिन्न शाकाहारी व्यंजनों के साथ परोसा जाता है।

2. दिल्ली में ओणम कहाँ मनाया जाता है?
दिल्ली में केरल हाउस, साकेत के महाबेली और कई अन्य दक्षिण भारतीय रेस्टोरेंट्स में इसे बड़े स्तर पर मनाया जाता है।