मदुरै की कलाकार बी. संगमित्र ने एक विशेष मंडला कार्यशाला शुरू की है, जहाँ ड्राइंग और जर्नलिंग के माध्यम से लोगों को तनाव कम करने और स्वयं को गहराई से समझने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
- बी. संगमित्र की कार्यशाला मंडला कला और माइंडफुल जर्नलिंग का एक अनूठा संगम है।
- 'सेल्फ-चेक' और '3S' (स्लो, सॉफ्ट, स्ट्रॉन्ग) जैसे अभ्यासों से बाहरी अनुमोदन की निर्भरता को कम किया जाता है।
- यह कोर्स 90 मिनट के एक दिवसीय सत्र और 10 दिवसीय विस्तृत सत्र के रूप में उपलब्ध है।
तमिलनाडु के मदुरै शहर में कला का एक नया स्वरूप उभर रहा है, जो केवल कागज पर सुंदर पैटर्न बनाने तक सीमित नहीं है। 36 वर्षीय कलाकार बी. संगमित्र ने एक 10-दिवसीय मंडला कार्यशाला की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य ड्राइंग और जर्नलिंग के माध्यम से लोगों को अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी से ब्रेक लेने और आत्म-चिंतन करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
इस कार्यशाला में ड्राइंग को केवल सुंदरता के पैमाने पर नहीं, बल्कि मानसिक शांति के उपकरण के रूप में देखा जाता है। संगमित्र 'सेल्फ-चेक' (स्व-जांच) नामक एक विशेष अभ्यास कराती हैं, जिसमें प्रतिभागियों से यह सवाल पूछा जाता है कि क्या वे अपने जीवन के निर्णय अपनी खुशी के लिए ले रहे हैं या केवल दूसरों को खुश करने के लिए। यह अभ्यास लोगों को 'पीपल-प्लीजिंग' (दूसरों को खुश करने की आदत) से बाहर निकलने में मदद करता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि डिजिटल युग के तनाव और बर्नआउट के कारण दुनिया भर में 'आर्ट थेरेपी' की मांग बढ़ी है। संगमित्र का यह दृष्टिकोण मंडला कला को केवल एक सजावटी वस्तु से बदलकर मानसिक स्वास्थ्य के निदान के एक माध्यम के रूप में स्थापित करता है, जो आधुनिक समाज के लिए अत्यंत आवश्यक है।
कार्यशाला का सबसे दिलचस्प हिस्सा '3S' अभ्यास है—स्लो, सॉफ्ट और स्ट्रॉन्ग (धीमा, कोमल और मजबूत)। इसमें प्रतिभागियों को सकारात्मक कथनों (Affirmations) को ट्रेस करने के लिए कहा जाता है, लेकिन शर्त यह होती है कि उन्हें निर्धारित समय के भीतर ड्राइंग पूरी नहीं करनी है। पेंसिल का दबाव यह दर्शाता है कि व्यक्ति मानसिक रूप से कितना तनावग्रस्त है; हल्का दबाव मानसिक शांति और प्रवाह का प्रतीक है।
"मंडला केवल एक कलाकृति नहीं है, बल्कि यह स्वयं से बातचीत शुरू करने का एक शुरुआती बिंदु है।"
इसके अलावा, कार्यशाला में 'ट्रिगर चेक' शामिल है, जहाँ प्रतिभागी यह पहचानते हैं कि कौन सी बातें उन्हें भावनात्मक रूप से प्रभावित करती हैं। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से भी उपलब्ध है, जिससे दुनिया के किसी भी कोने से लोग इस मानसिक स्वास्थ्य यात्रा का हिस्सा बन सकते हैं।
इस कार्यशाला की फीस को बहुत किफायती रखा गया है ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। 90 मिनट के एक दिवसीय सत्र के लिए ₹300 और 10 दिवसीय विस्तृत सत्र के लिए ₹1200 निर्धारित किए गए हैं।
| कार्यशाला का प्रकार | अवधि | मुख्य फोकस | शुल्क |
|---|---|---|---|
| परिचयात्मक | 90 मिनट | बेसिक सेल्फ-चेक | ₹300 |
| विस्तृत | 10 दिन | गहन चिंतन और जर्नलिंग | ₹1200 |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या इस कार्यशाला में शामिल होने के लिए मुझे पेंटिंग आनी चाहिए?
नहीं, यह कार्यशाला कलात्मक पूर्णता के बारे में नहीं, बल्कि मानसिक जागरूकता और आत्म-चिंतन के बारे में है।
क्या मदुरै के बाहर के लोग भी इसमें भाग ले सकते हैं?
हाँ, यह कार्यशाला ऑनलाइन प्रारूप में भी उपलब्ध है, जिससे कोई भी कहीं से भी जुड़ सकता है।