महाराष्ट्र सरकार ने पुणे-नासिक सेमी-हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के मूल मार्ग की फिर से जांच करने के लिए डॉ. अनिल काकोडकर की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। यह निर्णय GMRT रेडियो टेलिस्कोप और स्थानीय राजनीतिक मांग के बीच संतुलन बनाने के लिए लिया गया है।
मुख्य बातें
- डॉ. अनिल काकोडकर की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति का गठन।
- GMRT रेडियो टेलिस्कोप के 'रेडियो-साइलेंस ज़ोन' की सुरक्षा पर ध्यान।
- मूल मार्ग बनाम संशोधित मार्ग (अहिल्यानगर-शिर्डी) के बीच तकनीकी मूल्यांकन।
- समिति को 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।
महाराष्ट्र सरकार ने पुणे-नासिक सेमी-हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बुधवार को जारी एक सरकारी प्रस्ताव (GR) के अनुसार, सरकार ने एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है जो यह जांच करेगी कि क्या मूल प्रस्तावित मार्ग को बिना किसी बदलाव के लागू किया जा सकता है।
इस समिति का नेतृत्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. अनिल काकोडकर कर रहे हैं। समिति का मुख्य कार्य यह निर्धारित करना है कि क्या रेल मार्ग को इस तरह से डिजाइन किया जा सकता है कि वह खोडद (पुणे जिला) स्थित जायंट मेट्रवेव रेडियो टेलीस्कोप (GMRT) की संवेदनशीलता को प्रभावित न करे। वैज्ञानिकों का तर्क है कि रेल संचालन से उत्पन्न होने वाला विद्युत चुम्बकीय हस्तक्षेप (Electromagnetic Interference) खगोलीय अवलोकनों में बाधा डाल सकता है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह निर्णय?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल बुनियादी ढांचे का नहीं, बल्कि विज्ञान और क्षेत्रीय विकास के बीच के संघर्ष का है। एक तरफ GMRT जैसी वैश्विक स्तर की वैज्ञानिक सुविधा है, तो दूसरी तरफ संगमनेर और अकोले जैसे क्षेत्रों के लोगों की मांग है कि उन्हें मूल मार्ग का आर्थिक लाभ मिले।
तकनीकी समाधान जैसे टनलिंग या एलिवेटेड ट्रैक के माध्यम से विज्ञान और विकास के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।
गौरतलब है कि पूर्व में रेल मंत्रालय ने अहिल्यानगर और शिर्डी के माध्यम से एक संशोधित मार्ग का प्रस्ताव दिया था, जिसे स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने विरोध का सामना करना पड़ा। विरोध करने वालों का कहना है कि मूल मार्ग पर पहले ही भूमि अधिग्रहण और मुआवजे का काम किया जा चुका है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
इस रेल कॉरिडोर का प्रस्ताव पहली बार 2018 में दिया गया था। फरवरी 2023 में, रेल मंत्रालय ने खोडद के पास से गुजरने वाले मार्ग को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी, लेकिन बाद में वैज्ञानिक आपत्तियों के कारण मार्ग बदलने की प्रक्रिया शुरू हुई।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. विशेषज्ञ समिति में कौन शामिल है?
समिति में डॉ. अनिल काकोडकर, रेलवे बोर्ड के सदस्य विवेक गुप्ता और पुणे एवं नासिक के संभागीय आयुक्त शामिल हैं।
2. समिति को कितना समय दिया गया है?
समिति को अपनी सिफारिशें 60 दिनों के भीतर राज्य सरकार को सौंपनी होंगी।