पुणे के आदिवासी छात्र सुरक्षा और वित्तीय सहायता की मांगों को लेकर 11वें दिन भी भूख हड़ताल पर हैं। छात्र प्रतिनिधि आज मुंबई में आदिवासी विकास मंत्री से मिलकर अपनी मांगों को रखेंगे।

  • पुणे के आदिवासी छात्र 11 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
  • छात्रों की मांग है कि उन्हें ₹1 करोड़ का बीमा कवर और बेहतर सुरक्षा मिले।
  • प्रतिनिधिमंडल आज मुंबई में आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक उइके से मुलाकात करेगा।

पुणे: महाराष्ट्र के पुणे में आदिवासी छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज होता जा रहा है। पुणे के आदिवासी बॉयज हॉस्टल में चल रही भूख हड़ताल आज 11वें दिन भी जारी रही। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के सदस्य बालाकृष्ण गवारी के अनुसार, छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल आज मुंबई के मंत्रालय में आदिवासी विकास मंत्री प्रो. डॉ. अशोक रामजी उइके से मिलने जा रहा है। छात्र मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी मिलने और अपनी मांगों को उन तक पहुँचाने की योजना बना रहे हैं।

मुख्य मांगें और संघर्ष का कारण

भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों में श्वेता गिरनाक, निकिता मेचकर, शरद थोकल, विजय भांडले, राहुल धनवे और राजाराम पडवी शामिल हैं। ये छात्रHadapsar-Manjari सीमा के पास स्थित आदिवासी सरकारी छात्रावास में अपना उपवास जारी रखे हुए हैं। छात्रों का मुख्य उद्देश्य सरकार के 14 अगस्त, 2026 के उस सरकारी प्रस्ताव (GR) को वापस लेना है, जो उनके हितों के खिलाफ माना जा रहा है।

छात्रों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
1. छात्रावास और आश्रम स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना।
2. आदिवासी छात्रों के लिए ₹1 करोड़ का बीमा कवर प्रदान करना।
3. भत्तों को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) से जोड़ना ताकि मुद्रास्फीति के साथ वे बढ़ सकें।
4. छात्रावासों में खाली पदों (चपरासी, सुरक्षा गार्ड, सफाईकर्मी) को तुरंत भरना।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह आंदोलन केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आदिवासी छात्रों की सुरक्षा और सम्मान की लड़ाई है। हाल ही में गढ़चिरौली में सांप के जहर से तीन आदिवासी छात्रों की मौत ने इस मुद्दे को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। छात्र अब मृतक छात्रों के परिवारों के लिए ₹1 करोड़ के मुआवजे की भी मांग कर रहे हैं।

आदिवासी छात्रों का यह आंदोलन राज्य सरकार की कल्याणकारी नीतियों की प्रभावशीलता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

आदिवासी छात्र लंबे समय से छात्रावासों की खराब स्थिति और पर्याप्त संसाधनों की कमी की शिकायत करते रहे हैं। छात्र मांग कर रहे हैं कि सरकार 11 नवंबर, 2011 के पुराने सरकारी प्रस्ताव को संशोधित करे ताकि वह वर्तमान आर्थिक स्थितियों और बढ़ती महंगाई के अनुरूप हो सके।

Did You Know?: महाराष्ट्र में आदिवासी छात्र मुख्य रूप से आश्रम स्कूलों और सरकारी छात्रावासों पर निर्भर हैं, जो उनकी शिक्षा का आधार हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: छात्र किस मुख्य मांग के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं?
उत्तर: छात्र सुरक्षा, ₹1 करोड़ का बीमा कवर और महंगाई के अनुसार भत्तों में वृद्धि की मांग कर रहे हैं।

प्रश्न 2: भूख हड़ताल कितने दिनों से चल रही है?
उत्तर: यह भूख हड़ताल 11वें दिन भी जारी है।