पुणे के मंजरी स्थित सरकारी आदिवासी छात्रावास में छात्रों का विरोध प्रदर्शन नौवें दिन भी जारी रहा, जिसमें दो छात्रों को गंभीर स्थिति के कारण अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। छात्र सरकार की नई नीतियों और सुरक्षा संबंधी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
- पुणे के मंजरी में आदिवासी छात्रों का अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल नौवें दिन भी जारी।
- साशून अस्पताल में दो छात्र गंभीर हालत में भर्ती, सांस लेने में कठिनाई और डिहाइड्रेशन की समस्या।
- मुख्य मांगें: छात्रावास नियमों में बदलाव, गढ़चिरौली सांप काटने की घटना के लिए मुआवजा और सरकारी नौकरियों की बहाली।
महाराष्ट्र के पुणे जिले के मंजरी क्षेत्र में स्थित सरकारी आदिवासी छात्रावास में चल रहा छात्रों का अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आंदोलन अब और भी गंभीर हो गया है। शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को इस आंदोलन के नौवें दिन, दो छात्रों की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, 22 वर्षीय विजय भानबले और 24 वर्षीय राहुल धनवे को सांस लेने में तकलीफ और अत्यधिक डिहाइड्रेशन के कारण साशून अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वर्तमान में, निकिता मेटकर (22), श्वेता गिरनाक (26) और शरद थोकल भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं, जो आदिवासी समुदाय के अधिकारों और सुरक्षा के लिए आवाज उठा रहे हैं।
प्रमुख मांगें और विवाद के कारण
छात्रों का विरोध मुख्य रूप से सरकार द्वारा 5 अगस्त को जारी किए गए नए प्रस्ताव के खिलाफ है। इस प्रस्ताव में आयु सीमा और शैक्षणिक अंतराल (academic breaks) से संबंधित कुछ ऐसी शर्तें लगाई गई हैं जिन्हें छात्र 'अनुचित' मान रहे हैं। इसके अलावा, छात्रावास के निवासियों के लिए आंशिक रोजगार (part-time employment) पर प्रतिबंध लगाने वाले प्रावधान का भी कड़ा विरोध किया जा रहा है।
प्रदर्शन नेता शरद थोकल ने तर्क दिया कि 18 वर्ष से अधिक आयु के छात्रों को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने के लिए काम करने की अनुमति मिलनी चाहिए। छात्रों की अन्य प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- छात्रावास में 70% सीटों को उसी जिले के छात्रों के लिए आरक्षित करने वाले नियम को खत्म करना।
- गढ़चिरौली के एक आदिवासी आवासीय विद्यालय में सांप के काटने से तीन लड़कियों की मौत के मामले में प्रत्येक परिवार को ₹1 करोड़ का मुआवजा।
- मृत्यु के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करना।
- 12,500 आदिवासी पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करना और PESA कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह आंदोलन केवल छात्रावास के नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आदिवासी छात्रों के आर्थिक सशक्तिकरण और बुनियादी सुरक्षा अधिकारों की एक बड़ी लड़ाई है। सरकार की हालिया नीतियां छात्रों के बीच असुरक्षा और असंतोष पैदा कर रही हैं, जो भविष्य में व्यापक सामाजिक असंतोष का कारण बन सकती हैं।
छात्रों का यह संघर्ष प्रशासनिक उदासीनता और आदिवासी कल्याण के दावों के बीच के गहरे अंतर को उजागर करता है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: छात्र किन कारणों से भूख हड़ताल कर रहे हैं?
उत्तर: छात्र छात्रावास के नए नियमों, रोजगार पर प्रतिबंध और गढ़चिरौली में हुई मौतों के लिए मुआवजे की मांग को लेकर हड़ताल कर रहे हैं।
प्रश्न 2: वर्तमान में प्रदर्शनकारियों की स्थिति क्या है?
उत्तर: पांच छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं, जिनमें से दो की तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।