पुणे के सरकारी आदिवासी छात्रावास में छात्रों का विरोध प्रदर्शन 13वें दिन भी जारी है। जनजातीय मंत्री के साथ हुई वार्ता में कोई ठोस समाधान नहीं निकलने के बाद छात्रों ने अपना रुख कड़ा कर लिया है।

  • पुणे के आदिवासी छात्रावास में छात्रों का आंदोलन 13वें दिन भी जारी है।
  • जनजातीय मंत्री डॉ. अशोक रामजी उइके के साथ हुई बैठक निष्फल रही।
  • छात्रों ने फर्जी जाति प्रमाण पत्रों के माध्यम से नौकरियों में घुसपैठ का आरोप लगाया है।
  • महंगाई के अनुसार भत्ते और ₹10 करोड़ के बीमा कवर की मांग प्रमुख है।

पुणे: महाराष्ट्र के पुणे में सरकारी आदिवासी छात्र छात्रावास के बाहर चल रहा विरोध प्रदर्शन अब 13वें दिन भी जारी है। मंगलवार को छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुंबई स्थित मंत्रालय में जनजातीय मंत्री डॉ. अशोक रामजी उइके से मुलाकात की, लेकिन दुर्भाग्यवश यह वार्ता किसी ठोस आश्वासन या समझौते पर समाप्त नहीं हुई।

जनजातीय विभाग के सचिव विजय वाघमारे ने जानकारी दी कि सरकार ने छात्रों की एक प्रमुख मांग, जो 14 अगस्त 2026 को जारी सरकारी प्रस्ताव (GR) से संबंधित थी, उस पर रोक (stay order) लगा दी है। वाघमारे के अनुसार, सरकार ने छात्रावास प्रवेश से संबंधित मांग को स्वीकार किया है, लेकिन अन्य मांगों को लागू करने में समय लगेगा।

क्यों यह मामला गंभीर है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल छात्रावास प्रवेश का मामला नहीं है, बल्कि यह आदिवासी समुदाय के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़ा एक व्यापक मुद्दा बन गया है। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन देने से बच रहा है।

प्रशासनिक देरी और लिखित वादों का अभाव छात्रों के बीच अविश्वास को और गहरा कर रहा है।

छात्र संघर्ष समिति के सदस्य बालकृष्ण गवारी ने बताया कि छात्रों ने एक और गंभीर मुद्दा उठाया है—अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित 12,500 सरकारी पदों पर गैर-आदिवासियों द्वारा फर्जी जाति प्रमाण पत्रों के माध्यम से कब्जा करने का आरोप। उन्होंने मांग की है कि इन पदों को खाली कराकर वास्तविक आदिवासी उम्मीदवारों को नियुक्त किया जाए।

प्रमुख मांगें और संकट

वर्तमान में, शरद थोकल, विजय भांडले, राहुल धनवे और राजाराम पादवी जैसे छात्र भूख हड़ताल पर हैं। आंदोलन की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि श्वेता गिरनाक और निकिता मेकचर जैसे दो छात्र स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं।

छात्रों की मुख्य मांगों में शामिल हैं:

  • महंगाई सूचकांक (CPI) के आधार पर वार्षिक भत्तों में वृद्धि।
  • आदिवासी छात्रावासों और आश्रम स्कूलों में सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम।
  • प्रत्येक आदिवासी छात्र के लिए ₹10 करोड़ का बीमा कवर (गड़चिरौली में सांप के काटने से हुई मौतों के बाद यह मांग उठी है)।
  • छात्राओं के लिए पुणे में सुरक्षित और आधुनिक छात्रावास का निर्माण।
क्या आप जानते हैं?: हाल ही में गड़चिरौली में सांप के काटने से तीन आदिवासी छात्रों की मृत्यु के बाद, सुरक्षा और बीमा को लेकर यह आंदोलन और भी उग्र हो गया है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: छात्र मुख्य रूप से किस बात का विरोध कर रहे हैं?
उत्तर: छात्र छात्रावास प्रवेश के नियमों, भत्तों में वृद्धि और सुरक्षा संबंधी मांगों को लेकर विरोध कर रहे हैं।

प्रश्न 2: क्या सरकार ने उनकी मांगों पर कोई निर्णय लिया है?
उत्तर: सरकार ने छात्रावास प्रवेश से संबंधित GR पर रोक लगा दी है और अन्य मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है, लेकिन कोई लिखित समझौता नहीं हुआ है।