वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत के विकास के लिए सभी राज्यों का मजबूत होना जरूरी है, लेकिन पिछड़े राज्यों को सुधार के लिए विशेष सहायता और मार्गदर्शन की आवश्यकता है। उन्होंने एक मजबूत केंद्र की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
मुख्य बातें
- पिछड़े राज्यों को सुधारने के लिए केंद्र द्वारा 'हैंडहोल्डिंग' (सहायता) की आवश्यकता है।
- रक्षा, निर्यात और विनिर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए एक मजबूत केंद्र अनिवार्य है।
- राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा 'पड़ोसी को कंगाल करने' (beggar your neighbour) वाली नहीं होनी चाहिए।
- भारत की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए राज्यों का सशक्तिकरण जरूरी है।
नई दिल्ली में आयोजित 'इंडिया पॉलिसी फोरम 2026' के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत के संघीय ढांचे (Federalism) पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की समग्र प्रगति के लिए केवल कुछ राज्यों का विकास पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक राज्य का सशक्त होना अनिवार्य है।
सीतारामण ने कहा कि जो राज्य विकास की दौड़ में पीछे रह गए हैं, उन्हें केवल उपेक्षित नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा, "पिछड़े राज्यों को यह बताया जाना चाहिए कि वे पिछड़ नहीं सकते। कई बार हम सच कहने में झिझकते हैं, लेकिन उन्हें सुधार के लिए सख्ती से टोकना होगा और हर संभव सहायता प्रदान करनी होगी।"
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत के भीतर क्षेत्रीय असमानता आर्थिक स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती है। यदि कुछ राज्य तेजी से बढ़ते हैं और अन्य स्थिर रहते हैं, तो इससे देश के भीतर संसाधनों का असंतुलन पैदा होता है। वित्त मंत्री का तर्क है कि आर्थिक विकास केवल तभी समावेशी हो सकता है जब केंद्र सरकार एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाए।
"राज्यों को मजबूत होना चाहिए, लेकिन रक्षा और निर्यात जैसे राष्ट्रीय हितों के लिए एक सशक्त केंद्र का होना भी उतना ही आवश्यक है।"
वित्त मंत्री ने 'बेगर योर नेबर' (Beggar your neighbour) नीति की चेतावनी देते हुए कहा कि राज्यों को निवेश आकर्षित करने के लिए एक-दूसरे के खिलाफ प्रतिस्पर्धा नहीं करनी चाहिए। इसके बजाय, केंद्र को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जो पूरे देश के लिए विनिर्माण और निर्यात के नए द्वार खोलें।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में संघीय ढांचा राज्यों और केंद्र के बीच शक्तियों के बंटवारे पर आधारित है। ऐतिहासिक रूप से, आर्थिक असमानता के कारण उत्तर और दक्षिण भारत के बीच विकास का अंतर देखा गया है, जिसे पाटने के लिए वित्त आयोग और केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रयास करती रहती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. वित्त मंत्री ने 'पिछड़े राज्यों' के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि पिछड़े राज्यों को सुधार के लिए विशेष सहायता (Handholding) दी जानी चाहिए और उन्हें विकास की दौड़ में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
2. केंद्र की भूमिका क्या होनी चाहिए?
केंद्र को रक्षा, निर्यात और विनिर्माण जैसे राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर स्पष्ट नीति निर्धारित करने और निवेश के लिए एक अनुकूल वातावरण बनाने की आवश्यकता है।