कच्चे तेल की कीमतों में कमी और रिलायंस इंडस्ट्रीज में मजबूत खरीदारी के चलते गुरुवार को भारतीय शेयर बाजारों में बढ़त देखी गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही शुरुआती कारोबार में सकारात्मक रुख के साथ खुले।

मुख्य बातें

  • सेंसेक्स 201.43 अंक बढ़कर 78,782.43 पर खुला।
  • कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बाजार को सहारा मिला।
  • रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाइटन जैसे शेयरों में खरीदारी देखी गई।
  • RBI ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है।

भारतीय शेयर बाजार गुरुवार (6 अगस्त, 2026) को शुरुआती कारोबार में बढ़त के साथ खुले। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज में निवेशकों की सक्रिय खरीदारी ने बाजार को ऊपर की ओर धकेला। 30 शेयरों वाले BSE Sensex में 201.43 अंकों का उछाल देखा गया, जिससे यह 78,782.43 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि NSE Nifty में 16.35 अंकों की मामूली बढ़त के साथ यह 24,641 पर कारोबार कर रहा था।

बाजार की चाल और प्रमुख खिलाड़ी

बाजार के दिग्गजों में से Titan, Reliance Industries, Bharat Electronics, और State Bank of India जैसे शेयरों ने बढ़त दर्ज की। वहीं, दूसरी ओर Power Grid, Trent, और Axis Bank जैसे शेयरों में गिरावट या सुस्ती देखी गई। यह उतार-चढ़ाव सोमवार से शुरू हुए नए 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) के प्रभाव के बीच देखने को मिल रहा है, जिसका उद्देश्य मूल्य निर्धारण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि बाजार वर्तमान में दो महत्वपूर्ण कारकों के बीच संतुलन बना रहा है: वैश्विक कमोडिटी कीमतें और घरेलू मौद्रिक नीति। कच्चे तेल की कीमतों में कमी भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए राहत की बात है, जो मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद करती है।

आरबीआई के नीतिगत रुख और मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक फंडामेंटल्स ने घरेलू निवेशकों के बीच विश्वास को फिर से जगाया है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी अपनी हालिया बैठक में रेपो रेट को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया कि भविष्य के कदम डेटा पर आधारित होंगे। आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 6.7% कर दिया है, जो अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारतीय शेयर बाजार अक्सर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और केंद्रीय बैंक की नीतियों के प्रति संवेदनशील रहा है। जब भी तेल की कीमतें गिरती हैं, भारत का व्यापार घाटा कम होता है, जिससे बाजार में लिक्विडिटी और सकारात्मक धारणा बढ़ती है।

क्या आप जानते हैं?: भारतीय रिजर्व बैंक का 'न्यूट्रल' रुख यह दर्शाता है कि बैंक भविष्य में दरों में कटौती या वृद्धि दोनों के लिए तैयार है, जो बाजार की अस्थिरता को कम करता है।

Frequently Asked Questions

1. आज बाजार में बढ़त का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारणों में कच्चे तेल की कीमतों में कमी और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे बड़े शेयरों में खरीदारी शामिल है।

2. आरबीआई ने ब्याज दरों के बारे में क्या फैसला लिया है?
आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है और विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 6.7% कर दिया है।