उरलुगाल लेबर कॉन्ट्रैक्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी के चेयरमैन रमेसन पलेरी, 66, को कोयम्बटूर के निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। उनका शरीर कोझिकोड पहुँचाया जाएगा, अंतिम संस्कार बुधवार को आयोजित होंगे।

मुख्य बिंदु

  • रमेसन पलेरी, 66, का कोयम्बटूर में निधन
  • उरलुगाल सहकारी के चेयरमैन के रूप में 30 से अधिक साल का योगदान
  • शरीर कोझिकोड ले जाया जाएगा, अंतिम संस्कार बुधवार को

रमेसन पलेरी का निधन

रमेसन पलेरी, केरल के वडाकर में स्थित उरलुगाल लेबर कॉन्ट्रैक्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी (ULCCS) के चेयरमैन, 28 जुलाई 2026 को कोयम्बटूर, तमिलनाडु के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान 66 वर्ष की आयु में गुजर गए।

पलेरी ने 1990 के दशक से ही इस एशिया के सबसे बड़े सहकारी संस्थानों में से एक को आधुनिक प्रबंधन और तकनीकी नवाचार के साथ आगे बढ़ाया। उनका नेतृत्व ULCCS को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़े निर्माण परियोजनाओं में प्रमुख ठेकेदार बनाता रहा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

उरलुगाल सहकारी समाज की स्थापना 1905 में हुई थी, जिसका मूल उद्देश्य स्थानीय कारीगरों को संगठित करके रोजगार सृजन करना था। समय के साथ यह संस्था बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे, बिजली, जल और सड़क निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाने लगी। पलेरी ने 2000 के बाद से संस्थान के विस्तार, वित्तीय स्थिरता और सामाजिक उत्तरदायित्व को मजबूती प्रदान की।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that पलेरी का निधन केरल के सहयोगी-आधारित मॉडल के भविष्य को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि उनका अनुभव और नेटवर्क उद्योग में दुर्लभ है। इस क्षति से संस्थान की निरंतरता, नई परियोजनाओं की गतिकी और स्थानीय रोजगार पर असर पड़ सकता है।

"रमेसन पलेरी ने न केवल एक संस्था को विकसित किया, बल्कि कोरियाई मॉडल को वैश्विक मानकों तक पहुंचाया," कहा उद्योग विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार।
क्या आप जानते हैं?: उरलुगाल सहकारी समाज ने 1991 में भारत की पहली जल-विद्युत परियोजना पूरी की, जो अब भी देश की प्रमुख ऊर्जा स्रोतों में से एक है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या पलेरी के निधन के बाद ULCCS के नए अध्यक्ष का चयन कब होगा?

उत्तर: बोर्ड ने बताया है कि अगले दो हफ्तों में अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा, और स्थायी अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया शुरू होगी।

प्रश्न 2: क्या इस घटना से ULCCS की मौजूदा परियोजनाओं पर कोई असर पड़ेगा?

उत्तर: संस्थान ने आश्वासन दिया है कि सभी चल रही परियोजनाएँ बिना रुकावट के पूरी होंगी, क्योंकि संचालन टीम पहले से ही मजबूत है।