सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर ने जंतर मंतर के आसपास मोबाइल इंटरनेट बंद करने के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका को वापस ले ली है। यह कदम प्रोटेस्टों के समाप्त होने और इंटरनेट सेवाओं के पुनर्स्थापन के बाद आया।

मुख्य बिंदु

  • SFLC ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका वापस ली।
  • जंतर मंतर के 1.5 किमी के दायरे में इंटरनेट शटडाउन हटाया गया।
  • शटडाउन को असंवैधानिक, निरंकुश और अनुचित माना गया।

सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर, इंडिया (SFLC.In) ने 27 जुलाई 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट में जंतर मंतर के आसपास मोबाइल इंटरनेट बंद करने के आदेशों को चुनौती देने वाली सार्वजनिक याचिका (PIL) को वापस ले लिया। कोर्ट ने इस याचिका को "वापस ली गई" के रूप में खारिज कर दिया।

यह शटडाउन भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा 17, 20, 22 और 23 जुलाई को जारी किए गए आदेशों के तहत लागू किया गया था, जब कॉकरॉच जनता पार्टी (CJP) ने नेशनल एग्ज़ाम एग्ज़ाम ट्रीटमेंट (NEET) पेपर लीकेज और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े को लेकर जंतर मंतर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के बाद, 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े और सरकार द्वारा अन्य माँगों को स्वीकार करने के बाद, इंटरनेट सेवाएँ पुनः स्थापित की गईं। इस कारण ही SFLC ने अपने कानूनी कदम को समाप्त करने का निर्णय लिया।

SFLC की याचिका में बताया गया कि मोबाइल इंटरनेट की अस्थायी बंदी "कार्यपालिका को प्रदान की गई सबसे असाधारण दमनकारी शक्ति" है, जो संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a), 19(1)(b), 19(1)(g) और 21 के तहत आरक्षित स्वतंत्रताओं का उल्लंघन करती है। याचिकाकर्ता ने कहा कि शटडाउन आदेश न तो सार्वजनिक आपातकाल का उल्लेख करते हैं और न ही यह दर्शाते हैं कि व्यापक इंटरनेट प्रतिबंध क्यों आवश्यक था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

जंतर मंत्र, दिल्ली के दिल में स्थित, भारत के कई बड़े आंदोलन और विरोधों का स्थल रहा है। 2026 के इस प्रोटेस्ट में, CJP ने NEET पेपर लीकेज और शिक्षा मंत्रालय में असंतोष को उजागर किया, जिससे देशव्यापी चर्चा और राजनीतिक दबाव बना। इस प्रकार के बड़े प्रदर्शन अक्सर शासन के लिए चुनौती बनते हैं और कभी‑कभी इंटरनेट शटडाउन जैसी सुरक्षा उपायों को प्रेरित करते हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia analysis shows that withdrawing the petition underscores a rare judicial acknowledgment of the delicate balance between national security narratives and constitutional freedoms. यह घटना भविष्य में समान परिस्थितियों में इंटरनेट शटडाउन के कानूनी मानदंडों को पुनः परिभाषित कर सकती है।

"इंटरनेट शटडाउन को केवल आपातकालीन स्थिति में ही लागू किया जाना चाहिए, अन्यथा यह लोकतांत्रिक अधिकारों पर अनावश्यक प्रतिबंध है," कहा डिजिटल अधिकार विशेषज्ञ डॉ. अंजलि गुप्ता ने।
Did You Know?: भारत में अब तक 2025 में 57 बार इंटरनेट शटडाउन लागू किया गया है, जो विश्व के सबसे अधिक मामलों में से एक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या भविष्य में जंतर मंतर के आसपास फिर से इंटरनेट शटडाउन हो सकता है?

उत्तर: केवल तभी जब सरकार स्पष्ट आपातकाल या राष्ट्रीय सुरक्षा की गंभीर खतरे को सिद्ध कर सके।

प्रश्न 2: इस याचिका को वापस लेने से क्या कानूनी precedent स्थापित हुआ है?

उत्तर: यह निर्णय शटडाउन के वैधता पर भविष्य के न्यायिक परीक्षणों के लिए एक संदर्भ बिंदु हो सकता है।