कोसस्थलैया नदी में कई प्रजातियों की मछलियाँ और जलजीव मरते पाए गए। एनोर के मछुआरों ने जल प्रदूषण को लेकर सरकारी कार्रवाई की माँग में सड़क अवरोध किया।
मुख्य बिंदु
- कोसस्थलैया नदी में बड़े पैमाने पर मछली मृत पाई गईं।
- एनोर के मछुआरों ने जल प्रदूषण को लेकर विरोध किया।
- सरकारी अधिकारियों का अभाव और औद्योगिक कचरे का संदेह प्रमुख कारण हैं।
रविवार सुबह, कोसस्थलैया नदी के एस्ट्यूरी के निकट एनोर में मछली, झींगा और केकड़े मृत पाये गये। मडावै, किज़हंगन, ऊडन, करुवा और केलाथी जैसी विभिन्न प्रजातियों की मछलियाँ सतह पर तैर रही थीं और किनारे पर भी ढेर जमा हो गया था।
एनोर के आठ मछली पकड़ने वाले गाँवों के मछुआरों ने थाज़ानकुप्पम मुख्य सड़क पर रुकावट लगाई, यह आरोप लगाते हुए कि मछली मौत के बाद किसी भी सरकारी अधिकारी ने क्षेत्र का दौरा नहीं किया और कोई समाधान नहीं बताया गया।
स्थानीय मछुआरों का कहना है कि यह घटना पहले कभी नहीं देखी गई, और वे इसे औद्योगिक कचरे के जल में मिलाने के कारण मानते हैं। इस क्षेत्र में पहले से ही औद्योगिक अपशिष्ट, सीवेज, थर्मल डिस्चार्ज और फ्लाई एश की समस्या बनी हुई है।
राष्ट्रीय हरित न्यायालय (NGT) ने पहले भी एनोर बैकवाटर्स में फ्लाई एश के पर्यावरणीय प्रभाव को जांचने के लिए विशेषज्ञ समितियों का गठन किया था, जिससे जल, मिट्टी और जैव विविधता पर गंभीर असर दिखा।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the mass fish mortality not only threatens the livelihood of thousands of fisherfolk but also signals a broader ecological crisis that could affect Chennai’s coastal safety and food security.
"पर्यावरणीय विषाक्तता का स्तर अगर तुरंत नहीं घटाया गया तो यह क्षेत्रीय जलजीव विविधता के लिये अभिशाप बन सकता है," कहा पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. अंशु कुमार ने।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या मछली मौत का कारण निर्धारित किया गया है?
उत्तर: अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं निकला है, लेकिन जल नमूनों की जाँच चल रही है।
प्रश्न 2: सरकार ने इस समस्या को सुलझाने के लिये क्या कदम उठाए हैं?
उत्तर: मछुआरों ने तत्काल जल विश्लेषण और प्रदूषण नियंत्रण की मांग की है, पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।