भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद विनोद तावड़े ने सरकार से देश में स्किन डोनेशन (त्वचा दान) और स्किन बैंक प्रणालियों को मजबूत करने का आग्रह किया है। अपनी मां के निधन के बाद के व्यक्तिगत अनुभव को साझा करते हुए, तावड़े ने बताया कि कैसे त्वचा दान गंभीर रूप से झुलसे मरीजों की जान बचा सकता है।
मुख्य बिंदु
- त्वचा दान मृत्यु के 6 घंटे के भीतर किया जा सकता है और इसे 5 साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
- इसके लिए किसी ब्लड ग्रुप या टिश्यू मैचिंग की आवश्यकता नहीं होती है।
- सांसद विनोद तावड़े ने अपनी मां के निधन के बाद इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुधार की मांग संसद में उठाई।
संसद के मानसून सत्र के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद विनोद श्रीधर तावड़े ने देश में त्वचा दान (स्किन डोनेशन) और स्किन बैंकिंग प्रणालियों को सुदृढ़ करने की वकालत की। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि देश में गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के इलाज के लिए इस प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए। तावड़े ने इस संवेदनशील विषय को संसद के उच्च सदन में उठाते हुए अपने व्यक्तिगत जीवन के एक भावुक क्षण को साझा किया।
राज्यसभा में चर्चा के दौरान विनोद तावड़े ने बताया कि उनकी मां के निधन के बाद उन्हें इस बात का गहरा अहसास हुआ कि त्वचा दान का महत्व कितना अधिक है। उन्होंने सदन को संबोधित करते हुए कहा, "यह एक ऐसा विषय है जिसका अहसास मुझे तब हुआ जब मेरी मां का निधन हो गया। मैं सरकार से आग्रह करना चाहता हूं कि वे झुलसे हुए मरीजों के बेहतर इलाज के लिए स्किन डोनेशन और स्किन बैंकिंग सिस्टम को मजबूत करें।"
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में अंग दान की तुलना में त्वचा दान का इतिहास काफी सीमित और उपेक्षित रहा है। जबकि नेत्र दान और गुर्दा (किडनी) दान को लेकर समाज में कुछ हद तक जागरूकता आई है, त्वचा दान अभी भी मुख्यधारा के विमर्श से दूर है। देश के पहले स्किन बैंक की स्थापना के बाद से इस दिशा में कुछ प्रगति जरूर हुई है, लेकिन बुनियादी ढांचे और जागरूकता की भारी कमी के कारण आज भी हजारों झुलसे हुए मरीज समय पर त्वचा न मिलने के कारण दम तोड़ देते हैं। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, दान की गई त्वचा गंभीर रूप से झुलसे रोगियों के लिए एक अस्थायी सुरक्षात्मक आवरण के रूप में कार्य करती है, जो उन्हें संक्रमण से बचाती है और शरीर से तरल पदार्थ के अत्यधिक नुकसान को रोकती है।
| पैरामीटर | त्वचा दान (Skin Donation) | ठोस अंग दान (जैसे किडनी/दिल) |
|---|---|---|
| मृत्यु के बाद समय सीमा | 6 घंटे के भीतर | तत्काल (केवल ब्रेन डेथ के मामले में) |
| भंडारण अवधि | 5 वर्ष तक सुरक्षित रखा जा सकता है | केवल कुछ घंटे |
| मैचिंग की आवश्यकता | कोई मिलान (Matching) आवश्यक नहीं | सख्त ब्लड ग्रुप और HLA मिलान आवश्यक |
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में स्किन बैंकों की भारी कमी है, जिसके कारण केवल कुछ प्रतिशत झुलसे हुए मरीजों को ही समय पर स्किन ग्राफ्ट मिल पाता है। इस बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और राष्ट्रीय स्तर पर एक एकीकृत परिवहन प्रणाली विकसित करने से गंभीर रूप से झुलसे मरीजों की मृत्यु दर में 40% तक की कमी लाई जा सकती है। तावड़े ने यह भी उल्लेख किया कि त्वचा दान पहले से ही मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 के तहत शामिल है, लेकिन इसके लिए राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) के माध्यम से जन जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है।
"त्वचा दान आधुनिक चिकित्सा में सबसे कम उपयोग किए जाने वाले जीवन रक्षक उपायों में से एक है; जागरूकता बढ़ाकर हम झुलसे हुए मरीजों की जीवन रक्षा दर में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।" - चिकित्सा नीति विश्लेषक
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: मृत्यु के कितने समय बाद तक त्वचा दान किया जा सकता है?
उत्तर: मृत्यु के 6 घंटे के भीतर त्वचा दान किया जा सकता है और इसे विशेष तकनीकों द्वारा 5 साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
प्रश्न 2: क्या त्वचा दान के लिए ब्लड ग्रुप का मिलना जरूरी है?
उत्तर: नहीं, त्वचा दान के लिए किसी भी प्रकार के ब्लड ग्रुप या टिश्यू मैचिंग की आवश्यकता नहीं होती है। इसे किसी भी मरीज पर इस्तेमाल किया जा सकता है।