चेन्नई के कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र में ईवीएम सत्यापन प्रक्रिया के चौथे दिन अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मशीनों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या छेड़छाड़ का कोई प्रमाण नहीं मिला है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है और केवल मशीनों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है।
मुख्य बातें
- ईवीएम सत्यापन प्रक्रिया के चौथे दिन भी किसी भी प्रकार की धांधली के सबूत नहीं मिले।
- अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह पुनर्मतगणना नहीं, बल्कि मशीनों की विश्वसनीयता जांचने की प्रक्रिया है।
- कोलाथुर विधानसभा के 14 मतदान केंद्रों की मशीनों का परीक्षण किया जा रहा है।
- तकनीकी खराबी के कारण एक वीवीपैट (VVPAT) मशीन को बदलने का विकल्प दिया गया था।
चेन्नई के कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM), कंट्रोल यूनिट और वीवीपैट (VVPAT) मशीनों के सत्यापन का कार्य शनिवार को चौथे दिन भी जारी रहा। चेन्नई जिला चुनाव अधिकारी और ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन कमिश्नर जी.एस. समीरन ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में अब तक किसी भी प्रकार की अनियमितता या मशीन के साथ छेड़छाड़ का कोई प्रमाण नहीं मिला है।
श्री समीरन ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया पुनर्मतगणना (re-counting) नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार ईवीएम की विश्वसनीयता स्थापित करने के लिए एक 100% पारदर्शी अभ्यास है। उन्होंने बताया कि पिछले दो दिनों में सत्यापित की गई आठ ईवीएम में दर्ज किए गए वोट 'फॉर्म 20' में घोषित परिणामों से पूरी तरह मेल खाते हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि चुनाव प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए इस तरह का तकनीकी सत्यापन अत्यंत आवश्यक है। जब भी ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं, तो चुनाव आयोग द्वारा इस तरह की खुली जांच प्रक्रिया पारदर्शिता को मजबूत करने का काम करती है।
"यह पुनर्मतगणना नहीं है। यह ईवीएम की विश्वसनीयता स्थापित करने के लिए एक 100% पारदर्शी सत्यापन प्रक्रिया है।" - जी.एस. समीरन
सत्यापन के दौरान एक तकनीकी चुनौती भी सामने आई। कोलाथुर के एक मतदान केंद्र पर मॉक पोल के दौरान एक वीवीपैट मशीन की इंडिकेटर लाइट काम करना बंद कर गई। हालांकि, अधिकारियों ने तुरंत प्रोटोकॉल का पालन करते हुए मशीन बदलने का प्रस्ताव दिया, जिसे आवेदकों ने स्वीकार नहीं किया। इसके अलावा, सील के स्थान को लेकर उठ रहे सवालों पर अधिकारी ने कहा कि सभी मशीनें सही ढंग से सील की गई हैं और सील की पहचान उपलब्ध है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में ईवीएम का उपयोग व्यापक रूप से चुनावी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है। समय-समय पर मशीनों की सुरक्षा और उनके सॉफ्टवेयर की अखंडता को लेकर बहस होती रही है, जिसके परिणामस्वरूप चुनाव आयोग ने वीवीपैट (VVPAT) जैसी तकनीक को जोड़ा है ताकि मतदाता अपने वोट की पुष्टि कर सकें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. क्या यह वोटों की पुनर्मतगणना है?
नहीं, यह केवल ईवीएम की तकनीकी जांच और सत्यापन प्रक्रिया है।
2. यदि आवेदक मशीन का चयन नहीं करता है तो क्या होगा?
चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, अधिकारी रैंडम तरीके से मशीनों का चयन करेंगे और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करेंगे।