मदुरई नगर निगम ने व्यावसायिक परिसरों, अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों जैसे बड़े कचरा उत्पादकों को 15 दिनों के भीतर अनिवार्य पंजीकरण करने का आदेश दिया है। नए नियमों के तहत कचरे का स्रोत पर ही पृथक्करण करना आवश्यक होगा।
- बड़े कचरा उत्पादकों (BWGs) को 15 दिनों के भीतर CPCB वेबसाइट पर पंजीकरण करना होगा।
- 20,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र या 100 किलो प्रतिदिन कचरा पैदा करने वाली संस्थाएं इस दायरे में आएंगी।
- गीले, सूखे, चिकित्सा और विशेष कचरे के लिए अलग-अलग रंग के डस्टबिन रखना अनिवार्य है।
- नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मदुरई नगर निगम ने शहर के स्वच्छता ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। नगर निगम आयुक्त गौरव कुमार ने स्पष्ट किया है कि 'ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम - 2026' के तहत सभी बड़े कचरा उत्पादकों (Bulk Waste Generators - BWGs) को अब अनिवार्य रूप से अपना पंजीकरण कराना होगा। इस आदेश का उद्देश्य शहर में कचरा प्रबंधन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।
इस नए नियम के तहत, वे सभी संस्थान जो प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक कचरा उत्पन्न करते हैं, जिनका निर्मित क्षेत्र 20,000 वर्ग मीटर से अधिक है, या जो प्रतिदिन 40,000 लीटर से अधिक पानी की खपत करते हैं, उन्हें 'बल्क वेस्ट जनरेटर' माना जाएगा। इसमें आईटी पार्क, कारखाने, होटल, अस्पताल, शिक्षण संस्थान, विवाह हॉल और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) जैसे बड़े व्यावसायिक और आवासीय परिसर शामिल हैं।
नियमों का पालन कैसे करें?
पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल है। सभी संबंधित संस्थाओं को सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) की आधिकारिक वेबसाइट (https://swm.cpcb.gov.in/register) पर जाकर अपना विवरण दर्ज करना होगा। निगम ने निर्देश दिया है कि यह प्रक्रिया घोषणा की तारीख से 15 दिनों के भीतर पूरी हो जानी चाहिए।
संस्थाओं को अपने खर्च पर चार अलग-अलग रंगों के डस्टबिन स्थापित करने होंगे ताकि कचरे का स्रोत पर ही पृथक्करण (Source Segregation) किया जा सके। ये श्रेणियां हैं: गीला कचरा, सूखा कचरा, चिकित्सा कचरा और विशेष देखभाल वाला कचरा। पृथक किया गया कचरा भवन के प्रवेश द्वार पर रखा जाना चाहिए और निगम द्वारा मान्यता प्राप्त एजेंसी को सौंपा जाना चाहिए।
क्यों यह महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम शहरी स्वच्छता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। जैसे-जैसे शहरीकरण बढ़ रहा है, कचरे का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन गया है। स्रोत पर ही कचरे का पृथक्करण करने से लैंडफिल साइटों पर बोझ कम होगा और पुनर्चक्रण (Recycling) की प्रक्रिया अधिक कुशल बनेगी।
कचरे का प्रबंधन केवल सफाई का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक टिकाऊ शहरी भविष्य के निर्माण की दिशा में अनिवार्य कदम है।
यदि कोई संस्था अपने परिसर में गीले कचरे का प्रसंस्करण (Processing) करने में असमग्र है, तो उन्हें 'विस्तारित बल्क वेस्ट जनरेटर जिम्मेदारी' (Extended Bulk Waste Generator Responsibility) के तहत मान्यता प्राप्त अनुपालन प्रमाण पत्र खरीदना होगा। निगम के अधिकारियों को इन संस्थानों के कचरा प्रबंधन बुनियादी ढांचे और रिकॉर्डों का निरीक्षण करने का पूर्ण अधिकार होगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों को समय-समय पर सख्त किया गया है। 2016 के नियमों के बाद, अब 2026 के ये नए नियम अधिक केंद्रित हैं, जो बड़े उत्पादकों पर उनकी जिम्मेदारी डालते हैं ताकि नगर निकायों पर वित्तीय और परिचालन बोझ कम हो सके।
Frequently Asked Questions
1. पंजीकरण के लिए समय सीमा क्या है?
सभी बड़े कचरा उत्पादकों को नगर निगम की घोषणा के 15 दिनों के भीतर पंजीकरण करना अनिवार्य है।
2. यदि कोई संस्था पंजीकरण नहीं करती है तो क्या होगा?
नियमों का पालन न करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और भारी जुर्माना लगाया जाएगा।