CPI(M) नेता बाबू राव ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान जारी किए गए नोटिसों की कड़ी निंदा की है, जिससे लाखों मतदाताओं के मताधिकार पर संकट मंडरा रहा है।
- CPI(M) नेता बाबू राव ने चुनाव आयोग द्वारा मतदाताओं को जारी किए गए नोटिसों को 'अन्यायपूर्ण' बताया।
- आरोप है कि आंध्र प्रदेश में अब तक 45 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं।
- तकनीकी और लिपिकीय त्रुटियों के कारण मतदाताओं को बार-बार दस्तावेज जमा करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
विजयवाड़ा से एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जहाँ CPI(M) के राज्य सचिवालय सदस्य च. बाबू राव ने चुनाव आयोग (EC) की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। बाबू राव ने आरोप लगाया कि 'विशेष गहन संशोधन' (Special Intensive Revision - SIR) प्रक्रिया के दौरान जारी किए जा रहे नोटिस आम नागरिकों के लिए भारी कठिनाई का कारण बन रहे हैं।
बाबू राव ने अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बावजूद उन्हें नोटिस प्राप्त हुआ। विजयवाड़ा सेंट्रल विधानसभा क्षेत्र में उनका नाम मतदाता संख्या 467 के रूप में दर्ज था, लेकिन अधिकारियों ने उनके पिता के नाम में विसंगति का हवाला देते हुए उन्हें फिर से पूछताछ के लिए बुलाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह त्रुटि डेटा-एंट्री और लिप्यंतरण (transliteration) की गलतियों के कारण है, जिसके लिए मतदाता को दंडित नहीं किया जाना चाहिए।
क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यदि मतदाता सूची में इस तरह की व्यापक विसंगतियां रहती हैं, तो यह लोकतंत्र की नींव को कमजोर कर सकती है। यदि तकनीकी त्रुटियों के कारण पात्र मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित कर दिया जाता है, तो यह चुनावी निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े करता है।
तकनीकी और लिपिकीय त्रुटियों के लिए मतदाताओं को जिम्मेदार ठहराना लोकतंत्र के साथ अन्याय है।
बाबू राव ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश करते हुए दावा किया कि आंध्र प्रदेश में अब तक 45 लाख नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। इसके अलावा, लगभग 44 लाख अन्य मतदाताओं को नाम, आयु और अन्य विवरणों में विसंगतियों के कारण नोटिस जारी किए जा रहे हैं। विजयवाड़ा की तीन विधानसभा सीटों पर ही लगभग 1,37,297 मतदाताओं को नोटिस भेजे जाने की तैयारी है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में मतदाता सूची का संशोधन एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, लेकिन 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) का उद्देश्य डेटा की शुद्धता सुनिश्चित करना होता है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में डिजिटलीकरण के दौर में डेटा प्रविष्टि की त्रुटियों के कारण बड़े पैमाने पर नाम कटने की घटनाएं देखी गई हैं, जो राजनीतिक विवाद का विषय बनी रहती हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: मतदाता सूची में नाम कटने पर क्या करें?
उत्तर: यदि आपका नाम कट गया है, तो आप अपने स्थानीय निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) से संपर्क कर सकते हैं और सुधार के लिए फॉर्म 6 या संबंधित दस्तावेज जमा कर सकते हैं।
प्रश्न 2: SIR प्रक्रिया क्या है?
उत्तर: विशेष गहन संशोधन (SIR) का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह से शुद्ध और त्रुटिहीन बनाना है।