सरकार द्वारा गठित एक टास्क फोर्स ने SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के नियमों में संशोधन का सुझाव दिया है, जिसमें राहत राशि बढ़ाने और पीड़ितों के लिए विशेष पुनर्वास सेल बनाने पर जोर दिया गया है।
मुख्य बातें
- पीड़ितों के लिए आर्थिक राहत और पुनर्वास राशि में वृद्धि का प्रस्ताव।
- अत्याचार के मामलों में पीड़ितों और अभियुक्तों के लिए काउंसलिंग की सुविधा।
- भूमि विवाद के दौरान आदिवासियों के आजीविका अधिकारों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान।
- पीड़ितों के खिलाफ दर्ज होने वाली 'काउंटर FIR' पर लगाम लगाने का सुझाव।
भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत गठित एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत बनाए गए नियमों में महत्वपूर्ण संशोधनों की सिफारिश की है। इस टास्क फोर्स का मुख्य उद्देश्य वर्तमान राहत और पुनर्वास राशि को मुद्रास्फीति (inflation) के अनुरूप बढ़ाना है, क्योंकि मौजूदा दरें 2016 में निर्धारित की गई थीं।
टास्क फोर्स की सिफारिशों में न केवल आर्थिक सहायता, बल्कि मनोवैज्ञानिक सहायता पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। इसमें पीड़ितों, उनके आश्रितों और यहाँ तक कि अभियुक्तों के लिए भी काउंसलिंग (परामर्श) सत्र आयोजित करने का सुझाव दिया गया है। इसके अतिरिक्त, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष 'राहत और पुनर्वास सेल' स्थापित करने की योजना है ताकि सहायता प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जा सके।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम सामाजिक न्याय के ढांचे को मजबूत करने के लिए आवश्यक है। वर्तमान में, राहत राशि ₹85,000 से ₹8.25 लाख के बीच है, जो अपराध की गंभीरता पर निर्भर करती है। बढ़ती महंगाई के कारण यह राशि अब पीड़ितों की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त साबित हो रही है।
कानूनी सुधारों का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि पीड़ित को समाज में पुनः स्थापित करना और उन्हें आर्थिक व मानसिक संबल प्रदान करना होना चाहिए।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने अलग से भूमि विस्थापन से संबंधित मुद्दों को उठाया है। आयोग का सुझाव है कि जो आदिवासी समुदाय लंबे समय से चलने वाले अदालती मामलों के कारण अपनी जमीन से वंचित हैं, उन्हें आजीविका के लिए भूमि का उपयोग करने की अनुमति दी जानी चाहिए। साथ ही, पीड़ितों को डराने के लिए दर्ज की जाने वाली 'काउंटर FIR' को रोकने के लिए पुलिस रिपोर्टों की रैंडम जांच का प्रस्ताव भी दिया गया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम को अंतिम बार 2018 में संशोधित किया गया था। यह संशोधन उस समय आया था जब सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद देश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसमें गिरफ्तारी के लिए पूर्व अनुमति और अग्रिम जमानत जैसे प्रावधानों पर सवाल उठाए गए थे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. वर्तमान में राहत राशि कितनी है?
वर्तमान में, अपराध की गंभीरता के आधार पर राहत राशि ₹85,000 से ₹8.25 लाख तक है, जो 2016 के नियमों पर आधारित है।
2. 'काउंटर FIR' क्या है और यह क्यों चर्चा में है?
अक्सर अत्याचार की रिपोर्ट करने वाले पीड़ितों के खिलाफ प्रतिशोध के रूप में झूठी FIR दर्ज करा दी जाती है, जिसे 'काउंटर FIR' कहा जाता है। टास्क फोर्स इसे रोकने के उपाय खोज रही है।