हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरे के मद्देनज़र भारत ने हर भारतीय नाविक की स्थिति को रीयल‑टाइम ट्रैक करने वाला डैशबोर्ड और परिवारों के लिए एकल संपर्क अधिकारी स्थापित करने का आदेश दिया। यह कदम 9 मौतों, 1 संभावित मृत्यु और 7 चोटों को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 9 भारतीय नाविक मारे गए, 1 संभावित मृत, 7 घायल
- हर भारतीय नाविक के लिए रीयल‑टाइम डैशबोर्ड बनाना
- परिवारों के लिये एकल संपर्क अधिकारी नियुक्त करना
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जारी यूएस‑इरान तनाव के कारण भारतीय नौकायन कर्मियों की सुरक्षा को लेकर भारत सरकार ने व्यापक उपायों का दायरा तय किया। पोर्ट्स, शिपिंग और वाटरवे मंत्रालय के अंतर‑मंत्रालयीय बैठक में, पोर्ट्स मंत्री सरबनंदा सोनवाल ने सभी भारतीय नाविकों को ट्रैक करने के लिए एक ऑपरेशनल डैशबोर्ड बनाने का निर्देश दिया।
डैशबोर्ड की कार्यप्रणाली
इस डैशबोर्ड में जहाज की वास्तविक स्थिति, फ्लीट का स्वामित्व, माल, चालक दल की संख्या, स्वास्थ्य सुविधाएँ, ईंधन, भोजन और संचार साधनों की उपलब्धता जैसी जानकारी रीयल‑टाइम में दर्ज की जाएगी। यह प्रणाली पार्सियन गल्फ, स्ट्रेट ऑफ़ हॉरमज़ और खाड़ी ऑफ़ ओमान में संचालित सभी जहाजों पर लागू होगी, चाहे उनका झंडा कोई भी हो।
परिवारों के लिये संपर्क अधिकारी
किसी भी नाविक के घायल या मृत होने की स्थिति में, एक नियुक्त liaison officer परिवार के लिये “एकल संपर्क बिंदु” के रूप में कार्य करेगा। वह चिकित्सा अपडेट, यात्रा दस्तावेज़, पुनर्वास, वेतन बकाया, अनुबंधीय अधिकार और अन्य मुआवजा मामलों को समन्वयित करेगा। इस कदम से परिवारों को अनावश्यक भ्रम और देरी से बचाया जाएगा।
सहयोगी संस्थाएँ और अंतरराष्ट्रीय संवाद
डैशबोर्ड के कार्यान्वयन में विदेश मंत्रालय, भारतीय नौसेना, डाइरेक्टरेट जनरल ऑफ़ शिपिंग (DGS), तथा ईरान, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात में भारतीय मिशन की सहयोगी भूमिका होगी। साथ ही, भारत ने अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के मंचों पर भी इस समस्या को उठाया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुपालन को प्रवर्तित किया जा सके।
भविष्य की राह
सरबनंदा सोनवाल ने जहाज़ मालिकों, प्रबंधन एजेंसियों और भर्ती लाइसेंसधारियों को तुरंत अनुपालन रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है, ताकि कोई भी भारतीय नाविक अपर्याप्त सुरक्षा के तहत जहाज़ नहीं चलाए। यह पहल भारतीय समुद्री सुरक्षा नीति को एक नया मानक स्थापित करती है, जो क्षेत्रीय तनाव के बावजूद भारतीय समुद्री कर्मियों की रक्षा को प्राथमिकता देती है।