बिहार के खगरिया जिले में चलती ट्रेन पर हुए गोलीबारी में मृतक के पति को मारने की साजिश में मोटर वाहन निरीक्षक, उसके प्रेमी और एक हत्यार को गिरफ्तार किया गया। जांच ने इस हत्या को चोरी का दिखावा करने की कोशिश को भी उजागर किया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- मोटर वाहन निरीक्षक स्मिता कुमारी, उनके प्रेमी अजीत कुमार और हत्यारे राजू कुमार को गिरफ्तार किया गया।
- पीड़ित देव कुमार गुंजान को 11 जुलाई को जन्साधारण एक्सप्रेस में गोली मार कर मार दिया गया।
- तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्य ने चोरी के दिखावे को खारिज कर साजिश को उजागर किया।
बिहार के खगरिया जिले में 11 जुलाई को जन्साधारण एक्सप्रेस (मानसी‑सुपौल) के मार्ग पर एक दहशत भरी घटना घटी। ग्रेड‑I तकनीशियन देव कुमार गुंजान को बडलाघाट स्टेशन के पास गोली मार दी गई और वह अस्पताल में ही निधन कर गए। इस हत्या के पीछे एक जटिल साजिश का पर्दाफाश हुआ, जिसमें उनका ही जीवनसाथी स्मिता कुमारी, एक मोटर वाहन निरीक्षक, और उनके कथित प्रेमी अजीत कुमार शामिल थे।
घटना का विवरण
देव कुमार गुंजान, जो जमुई विद्युत विभाग में ग्रेड‑I तकनीशियन थे, अपनी पत्नी स्मिता कुमारी से मिलने के लिए ट्रेन में सवार हुए थे। स्मिता, जो 2023 में सुपौल में मोटर वाहन निरीक्षक (MVI) नियुक्त हुई थीं, ने अपने पति को ट्रेन के भीतर ही गोली मार कर मार डालने की साजिश रची। दो हत्यारे, राजू कुमार (उपनाम धीरज) को 4 लाख रुपये का भुगतान कर इस कृत्य को अंजाम दिया गया।
जांच की प्रक्रिया
मंत्रालयीय रेलवे पुलिस ने तुरंत केस दर्ज किया और विशेष जांच टीम (SIT) तथा विशेष टास्क फोर्स (STF) को इस मामले की जिम्मेदारी सौंपी। तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्य—जैसे बुलेट‑ट्रैजेक्टरी, डिजिटल ट्रैकिंग, और मोबाइल जिओ‑लॉकेशन—के आधार पर तीनों आरोपी को गिरफ्तार किया गया। जांच ने यह भी पुष्टि की कि स्मिता ने प्रारम्भिक चरण में इस हत्या को ट्रेन में चोरी का मामला दर्शाने की कोशिश की, परन्तु साक्ष्य ने इस ढोंग को तोड़ दिया।
संभावित प्रेरणा और सामाजिक प्रभाव
जांच के अनुसार, स्मिता और अजीत ने 2017 में साथ में विद्युत विभाग में नौकरी शुरू की, और 2018 में देव के साथ विवाह किया। उनके बीच रिश्ते में दरार आने के बाद अजीत ने स्मिता को अपने साथ रहने के लिए बाध्य करने हेतु इस हत्या की साजिश रची। यह मामला व्यक्तिगत संबंधों के कारण सार्वजनिक सुरक्षा पर पड़ने वाले खतरे को उजागर करता है, साथ ही रेलवे सुरक्षा के प्रोटोकॉल को पुनः समीक्षा करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।
भविष्य की दिशा
सभी तीन आरोपी को अब न्यायिक हिरासत में रखा गया है और आगे की सुनवाई में सज़ा के साथ-साथ उनके सहयोगी नेटवर्क की जाँच जारी रहेगी। यह घटना भारतीय न्याय प्रणाली और सुरक्षा एजेंसियों को संकेत देती है कि व्यक्तिगत विवादों को सार्वजनिक स्थानों में निपटाने के बजाय कानूनी रास्ते अपनाना अनिवार्य है।