देश बचाओ मोर्चा के तहत किसान ने पंजाब, हरियाणा और हिमाचल में मोटरसाइकिल रैली आयोजित की, जिसमें भारत-यूएस व्यापार समझौते को किसानों, छोटे उद्योगों और राष्ट्रीय खाद्य संप्रभुता के लिए हानिकारक बताया गया। उन्होंने केंद्र सरकार से कहा कि वह लोगों के हित में न रहने वाले किसी भी समझौते को लागू न करे।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • भारत-यूएस व्यापार समझौते का व्यापक दायरा कृषि, डेयरी, डिजिटल व्यापार, ऊर्जा और निवेश जैसे कई क्षेत्रों को शामिल करता है।
  • किसान संघों का मानना है कि आयात शुल्क में कमी से भारतीय किसानों, डेयरी उत्पादकों और छोटे उद्योगों को आर्थिक नुकसान हो सकता है।
  • यदि सरकार समझौते को आगे बढ़ाती है तो राष्ट्रव्यापी आंदोलन की संभावना बढ़ेगी, जिसमें नई दिल्ली में महा रैली की योजना भी शामिल है।

15 जुलाई को पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मोटरसाइकिल रैली का आयोजन किया गया, जहाँ हजारों किसान, मजदूर और छोटे व्यापारियों ने भारत-यूएस द्विपक्षीय व्यापार समझौते के खिलाफ विरोध किया। यह रैली देश बचाओ मोर्चा के प्रमुख मंच के तहत हुई, जो विभिन्न राज्यीय किसान संगठनों को एकत्रित करता है।

देश बचाओ मोर्चा का गठन और उद्देश्य

देश बचाओ मोर्चा एक छत्र संगठन है, जिसमें पंजाब की किसान मज़दूर मोर्चा, संयुक्त किसान मोर्चा (गैर‑राजनीतिक), आज़ाद किसान मोर्चा, भारतीय किसान मज़दूर संघर्ष संगठन और भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) जैसे प्रमुख समूह शामिल हैं। इन सभी का साझा लक्ष्य कृषि‑उद्योग‑सेवा क्षेत्रों में विदेशी प्रतिस्पर्धा से देश की आर्थिक और खाद्य संप्रभुता की रक्षा करना है।

प्रस्तावित व्यापार समझौते की प्रमुख विशेषताएँ

वर्तमान में समझौते का पूरा पाठ सार्वजनिक नहीं किया गया है, परंतु सरकार के आधिकारिक बयानों से पता चलता है कि यह केवल कुछ वस्तुओं के आयात‑निर्यात तक सीमित नहीं रहेगा। कृषि, डेयरी, डिजिटल व्यापार, बौद्धिक संपदा अधिकार, ऊर्जा, निवेश और बाजार प्रवेश जैसे प्रमुख क्षेत्रों को भी इस समझौते में शामिल किया जाएगा। अमेरिकी पक्ष ने भारतीय कृषि और डेयरी बाजार में अधिक पहुंच की माँग की है, जिससे आयात शुल्क में कमी की संभावना है।

किसानों की मुख्य चिंताएँ

देश बचाओ मोर्चा के समन्वयक सरवन सिंह पंधेर ने कहा, “यदि आयात शुल्क घटाया गया तो भारतीय किसान, डेयरी उत्पादक और छोटे उद्योगों को गंभीर आर्थिक नुकसान हो सकता है। हमें सरकार से अनुरोध है कि वह किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और राष्ट्रीय खाद्य संप्रभुता के हित में कार्य करे।” उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि समझौते के किसी भी ऐसे पहलू को लागू नहीं किया जाना चाहिए जो जनता के हित के विरुद्ध हो।

प्रदर्शन का विस्तार और भविष्य की योजना

पंजाब में कई किसान संगठनों ने मोटरसाइकिल रैली की, हरियाणा में बीकेयू (छादुनी) और किसान मज़दूर संघर्ष मोर्चा ने भाग लिया, उत्तर प्रदेश में एमएसपी दिलाओ मोर्चा ने मार्च किया, और हिमाचल में 27 संगठनों ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन किया। पंधेर ने कहा, “यदि हमारी बातों को अनदेखा किया गया और समझौता आगे बढ़ाया गया, तो राष्ट्रव्यापी आंदोलन को तीव्र किया जाएगा। हम 21 जुलाई को नई दिल्ली में महा रैली आयोजित करेंगे।”

राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव

यह विरोध भारत में चल रहे कई व्यापार समझौतों के व्यापक प्रभाव को उजागर करता है। अमेरिकी बाजार की ओर खुली नीति से भारतीय कृषि के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है, जबकि छोटे उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। सरकार को इस समय अंतरराष्ट्रीय दबाव और घरेलू सामाजिक असंतोष के बीच संतुलन बनाना होगा, जिससे भविष्य के व्यापार नीति में अधिक पारदर्शिता और किसानों की भागीदारी की आवश्यकता स्पष्ट होती है।