गुंटूर की एक विशेष अदालत ने 2020 के चर्चित दहेज उत्पीड़न मामले में दो आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, जिसके कारण एक महिला और उसकी बेटी ने जान दे दी थी।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • गुंटूर की विशेष अदालत ने दहेज उत्पीड़न के मामले में दो दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
  • 2020 में मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से तंग आकर एक महिला और उसकी बेटी ने आत्महत्या कर ली थी।
  • दोषियों पर आईपीसी की धारा 498A, 304B और दहेज निषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।

आंध्र प्रदेश के गुंटूर में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए बने विशेष न्यायालय ने बुधवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दहेज उत्पीड़न के मामले में दो व्यक्तियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जिला पुलिस अधीक्षक वकुल जिंदल ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए बताया कि यह मामला साल 2020 का है, जिसमें दहेज की मांग को लेकर एक विवाहित महिला और उसकी मासूम बेटी की जान चली गई थी।

मामले की पृष्ठभूमि और क्रूरता

अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के अनुसार, प्रकसम जिले के जे. पांगुलुरु की रहने वाली पीड़िता का विवाह 3 अगस्त, 2017 को नारा कल्याण चंद्र के साथ हुआ था। विवाह के समय पीड़िता के परिवार ने कथित तौर पर 400 ग्राम सोना, एक आवासीय भूखंड, कृषि भूमि और ₹1.5 लाख की नकद राशि दहेज के रूप में दी थी। हालांकि, शादी के कुछ समय बाद ही कल्याण चंद्र, उसके पिता नारा श्रीमनारायण और उसकी माँ नारा कामेश्वरी ने और अधिक दहेज की मांग को लेकर महिला को निरंतर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।

न्यायिक प्रक्रिया और फैसला

दहेज की अंतहीन मांगों और क्रूर प्रताड़ना से टूटकर, महिला ने अपनी छोटी बेटी के साथ 29 अगस्त, 2020 को गुंटूर में आत्महत्या कर ली थी। पीड़िता की माँ द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर, पत्ताबिपुरम पुलिस ने आईपीसी की धारा 498A (क्रूरता), 304B (दहेज मृत्यु) और 34 (समान मंशा) के साथ-साथ दहेज निषेध अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।

पांचवें अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश जी. दीना बाबू ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नारा कल्याण चंद्र और नारा कामेश्वरी को दोषी पाया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही, प्रत्येक दोषी पर ₹30,000 का जुर्माना भी लगाया गया है। इस मामले की जांच तत्कालीन वेस्ट सब-डिवीजन एसडीपीओ के. सुप्रजा ने की थी, जबकि अभियोजन पक्ष का नेतृत्व अतिरिक्त लोक अभियोजक मुत्तिनेनी सुब्बा राव ने किया।

समाज पर प्रभाव

यह फैसला समाज में दहेज प्रथा के खिलाफ एक कड़ा संदेश देता है। कानून के सख्त प्रवर्तन और त्वरित न्याय प्रक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा और दहेज के लिए किया जाने वाला उत्पीड़न किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह मामला उन परिवारों के लिए एक चेतावनी है जो लालच के वश में आकर मासूम जिंदगियों को जोखिम में डालते हैं।