केरल की एक्साइज़ विभाग ने कोच्चि में ‘डेड ड्रॉप’ तकनीक अपनाने वाले ड्रग तस्करों को पकड़ा, जिसमें 1.058 किलोग्राम गांजा शामिल था। इस विधि के बढ़ते उपयोग को रोकने के लिए विशेष जाँच टीम ने कई और बड़े मामले भी उजागर किए।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कोच्चि में ‘डेड ड्रॉप’ विधि से ड्रग तस्करी में तेज़ी से वृद्धि
- एक्साइज़ ने 1.058 किग्रा गांजा और कई बड़े नेटवर्क को उजागर किया
- ड्रग डिलिवरी के नए पैटर्न को रोकने के लिए त्वरित कार्रवाई की गई
केरल की एक्साइज़ विभाग ने कोच्चि के चक्करापरम्बु में एक आवासीय क्षेत्र में 1.058 किलोग्राम संदिग्ध गांजा जब्त किया, जबकि वह ‘डेड ड्रॉप’ नामक तस्करी की नई शैली को कुचलने के लिए तेज़ी से कार्रवाई कर रहा है। यह विधि, जिसमें तस्कर ड्रग पैकेज को विशिष्ट स्थानों पर छोड़ते हैं और खरीदारों को फोटो या वीडियो भेजते हैं, हाल ही में शहर में तेजी से लोकप्रिय हो गई है।
‘डेड ड्रॉप’ विधि का परिचय
‘डेड ड्रॉप’ मॉडल में ड्रग डीलर पहले से तय किए गए बिंदुओं—जैसे मेट्रो स्तंभ, शॉपिंग मॉल के क्रमांकित पार्किंग स्लॉट, दूरस्थ विद्युत खंभे या आवासीय घरों के बाहर—पर पैकेज छोड़ते हैं। फिर वे एक डिजिटल भुगतान प्राप्त करते हैं और खरीदार को सटीक स्थान का फोटो या वीडियो भेजते हैं। यह तंत्र पुलिस की निगरानी को चुनौती देता है क्योंकि यह सीधे संपर्क को समाप्त कर देता है।
एक्साइज़ की विशेष कार्रवाई
एक्साइज़ के विशेष दल, सर्कल इंस्पेक्टर रंजीत कुमार के नेतृत्व में, ने 14 जुलाई को एक खाली भूखंड में संभावित गांजा की पैकेज गिराते हुए एक व्यक्ति को पकड़ा। यह व्यक्ति, पश्चिम बंगाल मूल के शाहरुख खान (नाम समानता केवल संयोग) था, जिसने डिजिटल ट्रांसफ़र के माध्यम से अग्रिम भुगतान प्राप्त किया था। इस गिरफ्तारी के साथ विभाग ने यह स्पष्ट किया कि ‘डेड ड्रॉप’ मॉडल की पहचान और रोकथाम के लिए उन्होंने कई नई तकनीकी सहायता अपनाई है।
पहले के बड़े तस्करी नेटवर्क
विभाग ने बताया कि इस कार्रवाई के अलावा, उन्होंने ‘साइको साबु’ के नाम से जाने जाने वाले व्यक्ति के घर से 22 किलोग्राम गांजा और तमिलनाडु के मूल निवासी सेलवराज से 18 किलोग्राम गांजा भी जब्त किया। दोनों ने नदी के द्वीपों और रेलवे ट्रैक के निशानों के पास ड्रग पैकेज छोड़ने की रणनीति अपनाई थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ‘डेड ड्रॉप’ केवल कोच्चि तक सीमित नहीं है।
भविष्य की दिशा
केरल सरकार ने इस प्रकार की तस्करी को रोकने के लिए अधिक निगरानी कैमरों की स्थापना, डिजिटल ट्रैकिंग और सार्वजनिक जागरूकता अभियानों की घोषणा की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को पूरी तरह समझा और प्रतिबंधित किया गया तो ड्रग तस्करी में आने वाली नई चुनौतियों को मात देना संभव होगा।