हैदराबाद के मालाकपेट में 17 वर्षीय लड़की को एक पीओसीएसओ केस में बंधे व्यक्ति ने रात 2 बजे अपहरण किया। यह घटना परिवार के स्टॉकिंग शिकायत के बाद घटित हुई, जिससे पुलिस ने व्यापक खोज अभियान शुरू किया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • बेल पर छोड़े गए पीओसीएसओ आरोपी ने 17 वर्षीय लड़की को अपहृत किया
  • पुलिस ने पाँच खोज टीमें गठित कर लड़की और आरोपी की तलाशी जारी
  • इस घटना ने पीओसीएसओ कानून के प्रवर्तन में खामियों को उजागर किया

हैदराबाद, तेलंगाना – 15 जुलाई 2026 को सुबह मालाकपेट में रहने वाली एक 17 वर्षीय लड़की को उसके घर से जबरन ले जाया गया, जबकि वह पहले ही पीओसीएसओ (बच्चों के यौन शोषण से संरक्षण) अधिनियम के तहत एक आरोपी के खिलाफ स्टॉकिंग शिकायत दर्ज कर चुकी थी। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने शाम 2 बजे तक लड़की को अपने साथ ले जाते हुए CCTV फुटेज में पकड़ा गया।

पृष्ठभूमि और कानूनी ढांचा

पीओसीएसओ अधिनियम, 2012, भारत में बच्चों को यौन शोषण, उत्पीड़न और उत्पीड़न से बचाने के लिए बनाया गया था। इस कानून के तहत सेक्शन 11 में ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग और त्वरित कार्यवाही का प्रावधान है। जब परिवार ने स्टॉकिंग की शिकायत दर्ज की, तो पुलिस ने इस सेक्शन के तहत मामला दर्ज किया और आरोपी को जेल के बजाय जमानत पर रिहा कर दिया गया।

घटना का क्रम

लड़की नियमित रूप से अपने दादी के घर (अड्डागुडूर) जाती थी और इस दौरान आरोपी के साथ भावनात्मक जुड़ाव बना माना गया। सोमवार को, वह अपने बयान को दर्ज कराने के लिए भरोसा केंद्र भेजी गई, फिर परिवार ने उसे घर वापस ले आया। अगले दिन, लगभग 2 बजे, आरोपी ने उसे घर से बाहर निकाल लिया। स्थानीय निगरानी कैमरों ने दोनों को एक साथ निकलते हुए दिखाया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह एक सुनियोजित अपहरण था।

पुलिस की प्रतिक्रिया

हैदराबाद पुलिस ने पाँच अलग-अलग खोज टीमें गठित कीं, जो विभिन्न दिशाओं में लड़की और आरोपी की तलाश में लगी हैं। साथ ही, पुलिस ने CCTV, मोबाइल ट्रैकिंग और गवाहों के बयान का उपयोग कर व्यापक जांच कर रही है। इस मामले में संभावित दुरुपयोग और जमानत प्रणाली की कमियों पर सवाल उठे हैं।

पिछली समान घटनाओं से तुलना

यह घटना शाब्द पीओसीएसओ केस की याद दिलाती है, जहाँ जेल रिहा आरोपी ने छह लोगों की जान ले ली थी, जिनमें पीड़िता के परिवार के सदस्य भी शामिल थे। दोहराए जाने वाले इस प्रकार के मामलों ने सामाजिक सुरक्षा और बच्चों के अधिकारों की रक्षा में वैधता की मांग को तीव्र किया है।

अधिकाधिक आवाज़ें अब इस बात पर ज़ोर दे रही हैं कि जमानत पर रिहा होने वाले पीओसीएसओ आरोपी को अधिक कड़े निगरानी और पुनरावृत्ति रोकथाम उपायों की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी ही त्रासदियां न घटें।