Ukhrul जिले में हुए घातक हमले के बाद भारत के केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) ने मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) को कड़ा किया और एलीट CoBRA कमांडो को असम के सिलचर में विशेष प्रशिक्षण दिया। यह कदम राज्य में बढ़ती जातीय अशांति को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- Ukhrul ambush के बाद SOPs को कड़ा किया गया।
- CoBRA कमांडो को Manipur की विशिष्ट सुरक्षा चुनौतियों के लिए सिलचर में प्रशिक्षित किया गया।
- नए नियमों में बुरादा सफ़ाई, इंटेलिजेंस‑आधारित संचालन और कड़ी जवाबदेही शामिल है।
भारत के केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) ने Manipur में सुरक्षा स्थिति को स्थिर करने के उद्देश्य से अपना संचालन‑पद्धति पुनः परिभाषित किया है। 6 जुलाई को Ukhrul जिले में हुए घातक हमले, जिसमें दो असम राइफल्स के जवान मारे गए, के तुरंत बाद CRPF ने सभी इकाइयों के लिए नई मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SOPs) जारी कीं। ये SOPs सैनिकों की गति, मार्ग की सफ़ाई, जोखिम मूल्यांकन और कमांडर की जवाबदेही को सख़्ती से नियमन करती हैं।
CoBRA कमांडो का विशेष प्रशिक्षण
सिलचर, असम में आयोजित एक विस्तृत ओरिएंटेशन प्रोग्राम में CoBRA (Commando Battalion for Resolute Action) कमांडो को Manipur की जटिल सुरक्षा चुनौतियों के लिये तैयार किया गया। पहले ये इकाई मुख्य रूप से नक्सल‑विरोधी अभियानों में सक्रिय थी; अब उन्हें जातीय दंगे, भीड़ नियंत्रण, नागरिक‑सामना पुलिसिंग और इंटेलिजेंस‑आधारित ऑपरेशनों के लिये सिखाया गया। प्रशिक्षण में भीड़ प्रबंधन, काफिला सुरक्षा, क्षेत्रीय प्रभुत्व अभ्यास, और स्थानीय भू‑प्रकृति की परिचितता शामिल थी।
विस्तारित उपकरण और बलोत्पादन
सुरक्षा बलों की सुरक्षा को बढ़ाने के लिये लगभग 100 Marksman बख्तरबंद वाहनों को राज्य के विभिन्न जिलों में तैनात किया गया है। ये वाहन काफिला के आंदोलन, क्षेत्रीय पैट्रोल और संभावित बम विस्फोट या गोलीबारी से बचाव में मदद करेंगे। वर्तमान में Manipur में 300 से अधिक कंपनियों का सम्मिलित बल मौजूद है, जिसमें 206 CRPF कंपनियां, 100 BSF, 21 Assam Rifles, और अन्य CAPF इकाइयाँ शामिल हैं।
भविष्य की रणनीति और संभावित प्रभाव
नए SOPs, उन्नत प्रशिक्षण और बख्तरबंद वाहनों के संयोजन से CRPF का लक्ष्य Manipur में अस्थिरता को कम करना, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और अंततः सामान्य जीवन को पुनर्स्थापित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सैन्य उपायों से समस्या का समाधान नहीं हो सकता; राजनीतिक संवाद और सामाजिक विकास को साथ लेकर ही दीर्घकालिक शांति स्थापित होगी।