उपर, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और हरियाणा में एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट ने 16 जगहों की तलाशी में 40 लाख रुपये और 180 ग्राम सोना जब्त किया। यह कार्रवाई चार साल पहले उत्तर प्रदेश में एक बांग्लादेशी नागरिक की गिरफ्तारी से शुरू हुई, जिसने व्यापक आतंक वित्तीय नेटवर्क को उजागर किया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • ईडी ने चार राज्यों में 16 स्थलां पर तलाशी ली, 40 लाख रुपये और 180 ग्राम सोना बरामद किया।
  • जांच का मूल बिंदु उत्तर प्रदेश में चार साल पहले गिरफ्तार बांग्लादेशी नागरिक था।
  • परिचालन में रोहिंग्या और बांग्लादेशी प्रवासियों की अवैध प्रवेश, फर्जी पहचान दस्तावेज़ और संभावित आतंक फंडिंग शामिल है।

नई दिल्ली – एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और हरियाणा में 16 स्थानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया। इस ऑपरेशन में उत्तर प्रदेश के उत्तर-पूर्वी जिले में स्थित एक मदरसे, अल‑जामियातुल इस्लामिया दारुल उलूम, हरोआ, उत्तर 24 परगना में 40 लाख रुपये नकद और 180 ग्राम सोने के सिक्के बरामद किए गए।

जांच की पृष्ठभूमि

यह बड़े पैमाने पर कार्रवाई चार साल पहले उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक बांग्लादेशी नागरिक, मोहम्मद उर्फ अदिल‑उर‑रहमान, की गिरफ्तारी से उत्पन्न हुई। उत्तर प्रदेश एंटी‑टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) ने उनके पास फर्जी आधार और पैन कार्ड जैसी भारतीय पहचान दस्तावेज़ मिलने की जानकारी हासिल की। अदिल‑उर‑रहमान ने अपने सहयोगियों और एक व्यापक सिंडिके के बारे में जानकारी दी, जिसने रोहिंग्या और बांग्लादेशी प्रवासियों को भारत में अवैध रूप से प्रवेश कराया।

सिंडिके का नेटवर्क

एटीएस ने बताया कि यह सिंडिके पश्चिम बंगाल, दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश और कई उत्तर प्रदेश जिलों में सक्रिय था। इसका मुख्य उद्देश्य फर्जी पहचान दस्तावेज़ बनवाना, नकद और विदेशी फंड को हवालों के माध्यम से धुंधला करना और इन प्रवासियों को रोजगार, व्यापार और आवास प्रदान करना था। जांचकर्ताओं ने कहा कि कई चैरिटेबल ट्रस्ट और गैर‑सरकारी संगठनों को इस नेटवर्क में शामिल पाया गया, जो संभावित आतंक फंडिंग के साथ जुड़ा हुआ है।

पुलिस की कार्रवाई और अब तक की मिलीभगत

ईडी ने अब तक 15 अन्य स्थानों की तलाशी के परिणाम संकलित कर रहे हैं, जिसमें बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस और कई म्यूल खातों की बरामदगी शामिल है। सभी खोजें प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत की गईं। अधिकारियों ने कहा कि इस नेटवर्क के माध्यम से कम से कम 20 करोड़ रुपये की लेन‑देन हुई, जिसमें विदेशी फंडिंग और हवालों की व्यवस्था शामिल थी।

भविष्य की संभावनाएँ

जांच के जारी रहने से यह स्पष्ट हो सकता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इस प्रकार के मानव तस्करी और फर्जी दस्तावेज़ बनाने वाले नेटवर्क को रोकना अब प्राथमिकता बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी कार्रवाई से भविष्य में संभावित आतंकवादी वित्तीय स्रोतों को बाधित करने में मदद मिलेगी और सामाजिक सामंजस्य को बनाए रखने में योगदान मिलेगा।