केरल के कन्नूर जिले में निजी अस्पतालों की नर्सों द्वारा वेतन वृद्धि और सेवा शर्तों को लेकर की जा रही 62 दिनों की लंबी हड़ताल कोयिली अस्पताल के साथ समझौते के बाद समाप्त हो गई है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 62 दिनों से चल रही नर्सों की हड़ताल कोयिली अस्पताल के साथ समझौते के बाद समाप्त हुई।
- वेतन वृद्धि के लिए सेवा के वर्षों के आधार पर ₹2,500 से ₹5,500 तक का अंतरिम लाभ मिलेगा।
- 2017 के न्यूनतम वेतन आदेश के बकाया का भुगतान अगस्त 2026 से पांच किश्तों में किया जाएगा।
- प्रबंधन ने हड़ताल में शामिल नर्सों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने का आश्वासन दिया है।
केरल के कन्नूर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करने वाली एक बड़ी औद्योगिक लड़ाई का अंत हो गया है। छह निजी अस्पतालों की नर्सों द्वारा वेतन संशोधन और सेवा शर्तों में सुधार की मांग को लेकर की जा रही 62 दिनों की लंबी हड़ताल आखिरकार गुरुवार को समाप्त हो गई। यह सफलता तब मिली जब अंतिम संस्थान, कोयिली अस्पताल के प्रबंधन ने जिला श्रम अधिकारी की उपस्थिति में समझौते पर हस्ताक्षर किए।
समझौते की प्रमुख शर्तें और वेतन संरचना
भारतीय नर्स एसोसिएशन (INA) के राज्य महासचिव मोहम्मद शिहाब के नेतृत्व में हुए इस समझौते के तहत, कर्मचारियों को उनकी सेवा अवधि के आधार पर महत्वपूर्ण वेतन वृद्धि दी जाएगी। समझौते के विवरण के अनुसार, 100 से अधिक बेड वाले अस्पतालों में कार्यरत कर्मचारियों को उनकी सेवा अवधि के आधार पर क्रमशः ₹2,500 (1-5 वर्ष), ₹3,500 (5-10 वर्ष), और ₹5,500 (10-15 वर्ष) का अंतरिम वेतन लाभ मिलेगा। वहीं, 100 से कम बेड वाले अस्पतालों के लिए यह राशि क्रमशः ₹2,500, ₹3,500 और ₹5,000 निर्धारित की गई है।
बकाया भुगतान और सुरक्षात्मक उपाय
नर्सों के लिए एक बड़ी जीत यह भी रही कि 2017 के सरकारी आदेश के तहत निर्धारित न्यूनतम वेतन न पाने वाले कर्मचारियों को संशोधित वेतन दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, 2017 के न्यूनतम वेतन आदेश के तहत बकाया राशि का भुगतान 30 अगस्त, 2026 से पांच मासिक किश्तों में किया जाएगा। प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया है कि हड़ताल में भाग लेने के कारण किसी भी नर्स के खिलाफ कोई प्रतिशोधपूर्ण कार्रवाई नहीं की जाएगी और उनके अनुभव प्रमाण पत्र पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
राजनीतिक दबाव और संघर्ष का अंत
कोयिली अस्पताल द्वारा समझौते में देरी करने के कारण स्थानीय स्तर पर भारी विरोध प्रदर्शन देखा गया। युवा लीग और अखिल भारतीय युवा संघ (AIYF) जैसे संगठनों ने अस्पताल के बाहर घेराव किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिजली मंत्री सनी जोसेफ ने भी प्रदर्शनकारियों के प्रति एकजुटता व्यक्त की। अंततः, बढ़ते सामाजिक और राजनीतिक दबाव के बीच प्रबंधन को झुकना पड़ा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में सामान्य स्थिति बहाल हो सकी।