पश्चिम दिल्ली के रघुबीर नगर में सोमवार तड़के एक इमारत में भीषण आग लगने से दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों में एक नाबालिग भी शामिल है, जो ई-रिक्शा की बैटरी चार्ज कर रहे थे।

  • रघुबीर नगर, पश्चिम दिल्ली में भीषण आग से दो लोगों की जान गई।
  • मृतकों की पहचान मोहम्मद सुफेड (17) और मोहम्मद सहमाद (38) के रूप में हुई है।
  • घटना के समय ई-रिक्शा की पोर्टेबल बैटरियों को चार्ज किया जा रहा था।
  • पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या यहां अवैध चार्जिंग स्टेशन चलाया जा रहा था।

भारत की राजधानी दिल्ली के रघुबीर नगर इलाके में सोमवार की सुबह एक दर्दनाक हादसा हुआ, जहाँ एक रिहायशी इमारत में आग लगने से दो व्यक्तियों की मौत हो गई। मृतकों में 17 वर्षीय मोहम्मद सुफेड और 38 वर्षीय मोहम्मद सहमाद शामिल हैं, जो मूल रूप से बिहार के भागलपुर के रहने वाले थे। यह घटना उस समय हुई जब दोनों पीड़ित अपनी ई-रिक्शा की बैटरियों को चार्ज कर रहे थे।

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, सुफेड अपने पिता मोहम्मद नसीब और अपने मामा सहमाद के साथ रहता था। तीनों ही पेशे से ई-रिक्शा चालक थे। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों का आरोप है कि इमारत में बड़ी संख्या में बैटरियों को एक साथ चार्ज किया जा रहा था, जिससे अचानक एक जोरदार धमाका हुआ और देखते ही देखते पूरी जगह आग की लपटों में घिर गई।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह घटना दिल्ली के घने रिहायशी इलाकों में ई-रिक्शा चार्जिंग के लिए अपनाए जा रहे असुरक्षित तरीकों की ओर इशारा करती है। बिना किसी अग्नि सुरक्षा मानकों के, रिहायशी इमारतों को चार्जिंग पॉइंट में बदलना एक 'टिकिंग टाइम बम' की तरह है, जो किसी भी समय बड़ी त्रासदी का कारण बन सकता है।

"रिहायशी इलाकों में बिना उचित इलेक्ट्रिकल ऑडिट के भारी मात्रा में लिथियम-आयन बैटरियों को चार्ज करना जानलेवा साबित हो सकता है।"

मृतकों के भाई मोहम्मद रहमान ने बताया कि उनके पिता भी उसी इमारत में सोते थे, लेकिन किस्मत से उस रात वह किसी अन्य घर में रुके हुए थे, जिससे उनकी जान बच गई। उन्होंने इस घटना को सरासर लापरवाही करार दिया है।

सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस की पीसीआर टीम और दिल्ली फायर सर्विसेज (DFS) के कर्मी मौके पर पहुंचे। आग पर काबू पाने के बाद जब शवों को बाहर निकाला गया और उन्हें गुरु गोबिंद सिंह अस्पताल ले जाया गया, तो डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

क्या आप जानते हैं?: लिथियम-आयन बैटरियों में 'थर्मल रनअवे' नामक प्रक्रिया होती है, जिसमें ओवरचार्जिंग या शॉर्ट सर्किट होने पर बैटरी इतनी गर्म हो जाती है कि वह खुद-ब-खुद जलने लगती है और उसे बुझाना बेहद मुश्किल होता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: आग लगने का मुख्य कारण क्या माना जा रहा है?
शुरुआती जांच के अनुसार, ई-रिक्शा की बैटरियों को चार्ज करते समय शॉर्ट सर्किट या धमाका होने की संभावना है, हालांकि पुलिस विस्तृत जांच कर रही है।

p>प्रश्न 2: क्या यह कोई व्यावसायिक चार्जिंग स्टेशन था?
पुलिस फिलहाल इस बात की जांच कर रही है कि क्या उस इमारत में अवैध रूप से कोई व्यावसायिक चार्जिंग स्टेशन संचालित किया जा रहा था।