केरल राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) ने मदद पाने वाले लोगों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की प्रथा पर गहरी चिंता जताई है। आयोग ने सरकार से इस पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- SHRC ने सहायता प्राप्त करने वालों की गोपनीयता के उल्लंघन पर सरकार से तीन सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।
- 'स्नेहम सोशल मीडिया वेंडि' अभियान के तहत ज़हीर चिलिल द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई थी।
- आयोग का मानना है कि बिना सहमति के तस्वीरें साझा करना मानवीय गरिमा और निजता के अधिकार का उल्लंघन है।
- इस प्रथा के कारण कई जरूरतमंद लोग मदद लेने से कतरा रहे हैं।
केरल राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण हस्तक्षेप करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह तीन सप्ताह के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करे। यह निर्देश सहायता प्राप्त करने वाले व्यक्तियों की फोटोग्राफी और उनके वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह प्रथा न केवल निजता का उल्लंघन है, बल्कि मौलिक मानवाधिकारों पर भी प्रहार है।
शिकायत और 'स्नेहम सोशल मीडिया वेंडि' अभियान
यह मामला ज़हीर चिलिल द्वारा दायर एक शिकायत के बाद सुर्खियों में आया है, जो 'स्नेहम सोशल मीडिया वेंडि' (Sneham Social Mediakku Vendi) नामक अभियान के तहत शुरू किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विभिन्न प्रकार की सहायता प्राप्त कर रहे लोगों की तस्वीरें और वीडियो उनकी स्पष्ट सहमति के बिना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए जा रहे हैं। यह व्यवहार प्राप्तकर्ताओं की गोपनीयता और सम्मान के साथ जीने के उनके संवैधानिक अधिकार का सीधा उल्लंघन है।
मानवीय गरिमा बनाम सोशल मीडिया लोकप्रियता
शिकायतकर्ता ने एक गंभीर सामाजिक चिंता की ओर इशारा किया है: सहायता की आड़ में लोगों की लाचारी का उपयोग केवल सोशल मीडिया पर 'लाइक' और 'शेयर' पाने के लिए किया जा रहा है। इस प्रवृत्ति का सबसे दुखद पहलू यह है कि ऑनलाइन अपमान और तस्वीरों के वायरल होने के डर से कई वास्तव में जरूरतमंद लोग सहायता स्वीकार करने से भी हिचकिचा रहे हैं। इससे समाज के सबसे कमजोर वर्गों के लिए मदद के द्वार बंद होने का खतरा पैदा हो गया है।
सरकार से जवाबदेही की मांग
आयोग ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे वर्तमान में इस मुद्दे को रोकने के लिए लागू किए गए उपायों की व्याख्या करें। सरकार को यह भी बताना होगा कि क्या इस संबंध में कोई आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे। आयोग इस मामले पर अपनी अगली सुनवाई कन्नूर में करेगा।