मुंबई की एक विशेष पोक्सो कोर्ट ने पीछा करने और यौन उत्पीड़न के आरोपी 17 वर्षीय किशोर को अग्रिम जमानत दी है। कोर्ट ने माना कि बोर्ड परीक्षाओं के दौरान गिरफ्तारी छात्र के भविष्य के लिए अत्यधिक कष्टदायक होगी।

  • मुंबई की विशेष पोक्सो कोर्ट ने 17 वर्षीय किशोर को अग्रिम जमानत प्रदान की।
  • कोर्ट ने बोर्ड परीक्षा की तैयारी को जमानत का मुख्य आधार माना।
  • आरोपी पर पीछा करने और यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे।
  • कोर्ट ने पीड़िता से किसी भी तरह के संपर्क पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है।

मुंबई की एक विशेष POCSO कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए 17 वर्षीय किशोर को अग्रिम जमानत दे दी है, जिस पर एक सह-छात्रा का पीछा करने और यौन उत्पीड़न करने का आरोप था। विशेष न्यायाधीश आर.जे. पवार ने 17 अगस्त, 2026 को यह आदेश पारित किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस नाजुक समय में, जब छात्र अपनी कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है, उसकी गिरफ्तारी से उसे 'अत्यधिक कठिनाई' (disproportionate hardship) का सामना करना पड़ेगा।

मामले के विवरण के अनुसार, खार पुलिस ने किशोर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 78 और 351(2), तथा POCSO अधिनियम की धारा 12 के तहत मामला दर्ज किया था। अभियोजन पक्ष का तर्क था कि आरोपी और पीड़िता कॉलेज में एक-दूसरे को जानते थे, लेकिन जब पीड़िता के पिता ने संपर्क तोड़ने को कहा, तो आरोपी ने उसका पीछा करना और उसे परेशान करना शुरू कर दिया।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह फैसला किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) के मूल सिद्धांतों को रेखांकित करता है, जहां सुधार और शिक्षा को सजा से ऊपर रखा जाता है। यह मामला इस बात पर बहस छेड़ता है कि गंभीर आरोपों के बावजूद, शैक्षणिक भविष्य की सुरक्षा कानूनी प्रक्रिया में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

"किशोर न्याय प्रणाली का प्राथमिक उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि पुनर्वास और भविष्य की संभावनाओं की रक्षा करना है।"

बचाव पक्ष ने इन सभी आरोपों का खंडन किया है। आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि दोनों के बीच बातचीत आपसी सहमति से हो रही थी और यह प्राथमिकी (FIR) केवल प्रतिशोधात्मक कार्रवाई है। कोर्ट ने पाया कि आरोपी का कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और चूंकि सबूत दस्तावेजी और गवाहों पर आधारित हैं, इसलिए हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है।

अदालत ने 15,000 रुपये के व्यक्तिगत बॉन्ड और एक जमानतदार की शर्त पर अग्रिम जमानत मंजूर की। साथ ही, यह सख्त निर्देश दिया गया कि आरोपी पीड़िता से संपर्क नहीं करेगा, न ही उसके पास जाएगा। इसके अलावा, वह अदालत की अनुमति के बिना मुंबई नहीं छोड़ सकता।

strong>क्या आप जानते हैं?: किशोर न्याय अधिनियम की धारा 12(1) के तहत, कानून के साथ संघर्ष करने वाले बच्चों के लिए जमानत एक सामान्य नियम है, जबकि इनकार करना एक अपवाद है।

Frequently Asked Questions

1. कोर्ट ने छात्र को जमानत क्यों दी?
कोर्ट ने माना कि 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के दौरान गिरफ्तारी छात्र के भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित करेगी और वह एक प्रथम अपराधी है।

p>2. आरोपी पर कौन सी धाराएं लगाई गई थीं?
आरोपी पर BNS 2023 की धारा 78, 351(2) और POCSO अधिनियम की धारा 12 के तहत मामला दर्ज किया गया था।