प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारतीय रेलways की तीव्र इलेक्ट्रिफिकेशन ने वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान देश को सुरक्षित रखा। 2014 से पहले 30% से कम इलेक्ट्रिफ़ाइड नेटवर्क आज 99% तक पहुंच गया, जिससे हॉर्मुज़ बंद होने पर भी रेल संचालन में कोई बाधा नहीं आई।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 2014 से पहले 30% से कम ट्रैक इलेक्ट्रिफ़ाइड, अब 99% तक पहुँचा।
- इलेक्ट्रिफ़िकेशन ने हॉर्मुज़ संकट में रेल संचालन को स्थिर रखा।
- मोदी की पूर्वदृष्टि ने ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को मजबूत किया।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय रेलवे की तेज़ इलेक्ट्रिफ़िकेशन ने देश को वैश्विक ऊर्जा व्यवधानों से बचाया है। उन्होंने बताया कि यदि 2014 से पहले हॉर्मुज़ जलडमरमर हुआ होता, तो बड़ी संख्या में डीज़ल-चालित ट्रेनों के कारण रेल नेटवर्क पूरी तरह से ठहर जाता। आज लगभग 99% ट्रैक इलेक्ट्रिफ़ाइड होने के कारण इस संकट का कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
तथ्यात्मक पृष्ठभूमि / Historical Background: भारतीय रेलवे की इलेक्ट्रिफ़िकेशन की शुरुआत 1925 में हुई, लेकिन 90 वर्षों में केवल लगभग 30% ट्रैक ही इलेक्ट्रिफ़ाइड हो पाया। शेष 70% डीज़ल या कोयले पर निर्भर थे। 2014 में इलेक्ट्रिफ़ाइड प्रतिशत 30% से भी कम था, जिससे पूरे नेटवर्क को पूरी तरह इलेक्ट्रिक बनाने में दो सदियों का समय लग सकता था।
2014 के बाद सरकार ने इलेक्ट्रिफ़िकेशन को गति दी। पिछले 12 वर्षों में 99% रेल नेटवर्क को इलेक्ट्रिक किया गया, जिसमें हरियाणा में 100% ट्रैक इलेक्ट्रिफ़ाइड है। इस परिवर्तन ने न केवल ईंधन आयात पर निर्भरता घटाई, बल्कि ट्रेन संचालन में निरंतरता भी सुनिश्चित की।
| वर्ष | इलेक्ट्रिफ़ाइड प्रतिशत | डिज़ल प्रतिशत |
|---|---|---|
| 2014 | ≈30% | ≈70% |
| 2026 | ≈99% | ≈1% |
"इलेक्ट्रिफ़िकेशन ने भारतीय रेलवे को ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरणीय लाभ भी प्रदान किया है," कहा रेलवे विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह।
Why This Matters (इसके मायने क्या हैं)
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, इलेक्ट्रिक ट्रेनों का व्यापक उपयोग ईंधन की कीमतों में अस्थिरता को कम करता है और राष्ट्रीय ऊर्जा आयात पर दबाव घटाता है। सामान्य नागरिकों के लिए इसका मतलब है सस्ते टिकट, समय पर ट्रेन सेवा, और कम प्रदूषण। आर्थिक रूप से, यह कदम भारत को सतत विकास के लक्ष्यों की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम बनाता है।
हॉर्मुज़ जलडमरमर जैसी भू-राजनीतिक झंझटों में, तेल, डीज़ल और एएलपीजी जैसी वस्तुओं की आपूर्ति बाधित हो सकती है। लेकिन 99% इलेक्ट्रिफ़ाइड रेलवे नेटवर्क के कारण भारतीय रेल को इन आपूर्ति चेन से स्वतंत्रता मिली है, जिससे निर्यात‑आधारित उद्योगों और कृषि सेक्टर को निरंतर कच्चा माल उपलब्ध रहता है।
Frequently Asked Questions (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q: हॉर्मुज़ संकट में रेल नेटवर्क को ठहराने से बचाने में इलेक्ट्रिफ़िकेशन ने कैसे मदद की?
A: क्योंकि 99% ट्रैक इलेक्ट्रिक हैं, डीज़ल ईंधन की आपूर्ति में बाधा आने पर भी ट्रेनें चलती रहती हैं, जिससे पूर्ण ठहराव नहीं होता।
Q: क्या सभी भारतीय राज्यों में इलेक्ट्रिफ़िकेशन पूरा हो गया है?
A: अधिकांश प्रमुख मार्गों पर 99% से अधिक ट्रैक इलेक्ट्रिफ़ाइड है, लेकिन कुछ दूरस्थ क्षेत्रों में अभी भी छोटे हिस्से डीज़ल पर चलते हैं।