प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई हाइड्रोजन‑आधारित ट्रेन को ध्वज उठाया और साथ ही कई रणनीतिक बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं का शुभारंभ किया। यह कदम स्वच्छ ऊर्जा की ओर भारत की तेज़ी से बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का ध्वज उठाया गया
  • पर्यावरण‑सुरक्षित परिवहन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कई नई परियोजनाओं की घोषणा
  • हाइड्रोजन तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्रीय राजधानी के दक्षिणी हिस्से में स्थित बेंगलुरु‑हैदराबाद हाईस्पीड रेल कॉरिडोर पर भारत की पहली हाइड्रोजन‑आधारित ट्रेन को ध्वज उठाया। इस समारोह में कई राज्य एवं केंद्रीय मंत्री, वैज्ञानिक, और उद्योग के प्रतिनिधि शामिल थे। हाइड्रोजन ट्रेन को ‘हाइड्रोजन एग्ज़ीक्यूटिव’ कहा गया, जो 100 % स्वच्छ ऊर्जा पर चलाकर कार्बन उत्सर्जन को शून्य तक सीमित करती है।

पिछले पाँच वर्षों में हाइड्रोजन तकनीक में प्रगति

भारत ने 2020 में राष्ट्रीय हाइड्रोजन नीति प्रकाशित कर अपनी स्वच्छ ऊर्जा रणनीति को औपचारिक रूप दिया था। तब से, सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र ने हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण, और ट्रांसपोर्ट के लिए कई प्रयोगशालाएँ स्थापित की हैं। इस ट्रेन का विकास भारत के ‘इंडियन रेलवे’ (IR) और ‘इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ (IIT) के सहयोग से हुआ, जिसमें विदेशी कंपनियों के तकनीकी सहयोग को सीमित रखा गया।

मुख्य परियोजनाओं का शुभारंभ

ध्वज उठाने के साथ ही मोदी ने पाँच प्रमुख बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की घोषणा की: (i) 2,500 किमी की हाइड्रोजन‑फ्यूलिंग नेटवर्क, (ii) 10 गिगावॉट‑पीक सौर ऊर्जा संयंत्र, (iii) इलेक्ट्रिक‑वाइल्डफायर‑रोकथाम प्रणाली, (iv) राष्ट्रीय जल‑सौर‑हाइड्रोजन मिश्रित ऊर्जा ग्रिड, तथा (v) स्वच्छ ऊर्जा‑आधारित शहर‑परिवहन पहल। इन सभी का लक्ष्य 2030 तक भारत को कार्बन‑न्यूट्रल बनाना है।

अंतरराष्ट्रीय तुलना और आर्थिक प्रभाव

जापान, जर्मनी, और यूके जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं ने पहले ही हाइड्रोजन‑आधारित ट्रेनें परिचालन में लाई हैं। भारत का यह कदम न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ाता है, बल्कि वैश्विक हाइड्रोजन बाजार में प्रतिस्पर्धी बनता है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि अगले दशक में हाइड्रोजन‑आधारित परिवहन से अनुमानित 15 % तक रोजगार सृजन हो सकता है, साथ ही पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटेगी।

भविष्य की राह

हाइड्रोजन ट्रेन का सफल संचालन भविष्य में राष्ट्रीय रेल नेटवर्क में 30 % तक हाइड्रोजन‑भरी ट्रेनों को शामिल करने की नींव रखता है। सरकार ने इस दिशा में ‘हाइड्रोजन इंडिया 2035’ योजना के तहत R&D, स्टार्ट‑अप समर्थन, और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए एक विशेष फंड स्थापित करने की घोषणा की।