तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (TNPDCL) के अनुबंध कर्मचारियों ने नौकरी के नियमितीकरण और वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर कृष्णागिरी में जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का कहना है कि ऊर्जा विभाग में 70,000 से अधिक पद खाली हैं, फिर भी उन्हें नियमित नहीं किया जा रहा है।
मुख्य बातें
- TNPDCL कर्मचारियों ने नौकरी के नियमितीकरण और वेतन वृद्धि की मांग की।
- ऊर्जा विभाग में 70,000 से अधिक रिक्तियां होने का दावा।
- 6,788 कर्मचारियों को हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद नियमितीकरण नहीं मिला।
- ड्यूटी के दौरान बिजली की चपेट में आने वाले मृतकों के परिवारों के लिए नौकरी की मांग।
कृष्णागिरी: तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (TNPDCL) के अनुबंध कर्मचारियों ने शुक्रवार को कृष्णागिरी में अपनी मांगों को लेकर एक बड़े विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें नौकरी का नियमितीकरण, वेतन में वृद्धि और ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिवारों को सहायता प्रदान करना है।
तमिलनाडु बिजली विभाग अनुबंध कर्मचारी संघ के अनुसार, ऊर्जा विभाग में वर्तमान में 70,000 से अधिक रिक्तियां मौजूद हैं। इसके बावजूद, कर्मचारी वर्षों से अनुबंध पर काम कर रहे हैं। संघ ने बताया कि कई कर्मचारी पिछले 5 से 20 वर्षों से सेवा दे रहे हैं, लेकिन उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सरकारी विभागों में रिक्त पदों की मौजूदगी और अनुबंध श्रमिकों का शोषण एक गंभीर प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। जब विभाग के पास पर्याप्त मानव संसाधन के अवसर होते हैं, तो अनुभवी श्रमिकों को अस्थाई स्थिति में रखना न केवल आर्थिक अन्याय है, बल्कि यह कार्यबल के मनोबल को भी प्रभावित करता है।
"बरसों की सेवा के बाद भी अनुबंध पर बने रहना श्रमिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है, विशेषकर जब विभाग में हजारों पद खाली हों।"
प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि 6,788 कर्मचारियों ने नियमितीकरण के लिए उच्च न्यायालय से आदेश प्राप्त कर लिए हैं, लेकिन उन्हें अभी तक आधिकारिक आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं। इसके अलावा, उन्होंने मांग की है कि न्यूनतम वेतन बढ़ाकर ₹965 किया जाए और इसका भुगतान सीधे सरकार द्वारा किया जाए।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
तमिलनाडु में बिजली विभाग के भीतर अनुबंध बनाम नियमित कर्मचारी विवाद दशकों पुराना है। अक्सर तकनीकी सुधारों और बजट की कमी का हवाला देकर सरकारें नई नियुक्तियों से बचती हैं, जिससे मौजूदा कार्यबल पर दबाव बढ़ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: कर्मचारी वेतन वृद्धि के लिए कितनी राशि की मांग कर रहे हैं?
उत्तर: कर्मचारी चाहते हैं कि वेतन बढ़ाकर ₹965 किया जाए और इसका भुगतान सीधे सरकार द्वारा किया जाए।
प्रश्न 2: प्रदर्शनकारियों की अन्य प्रमुख मांग क्या है?
उत्तर: वे उन 250 कर्मचारियों के परिवारों के लिए नौकरी की मांग कर रहे हैं जिनकी ड्यूटी के दौरान बिजली के झटके से मृत्यु हो गई थी।