सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर पुल, टनल और फ़्लाईओवर वाले हिस्सों के लिए टोल गणना का तरीका बदल दिया है। नई NHAI सूत्र दो विकल्पों में से कम राशि चुनती है, जिससे कई यात्रियों को शुल्क में कमी मिल सकती है।

मुख्य बिंदु

  • नई NHAI टोल सूत्र दो विकल्पों में से कम राशि चुनता है।
  • लंबी पुल, टनल और फ़्लाईओवर वाले मार्गों पर शुल्क घट सकता है।
  • 60 मीटर से छोटे संरचनाओं को अलग नहीं माना जाएगा।

नया टोल गणना नियम क्या है?

नational Highways Authority of India (NHAI) ने उन राजमार्गों के लिए एक संशोधित टोल सूत्र पेश किया है जिनमें महंगे संरचनाएँ जैसे पुल, टनल और फ़्लाईओवर शामिल हैं। अब टोल दो गणनाओं में से कम वाले मान पर निर्धारित होगा: (i) संरचनाओं की लंबाई × 10 + शेष सड़क की लंबाई, या (ii) कुल सड़क की लंबाई × 5।

यात्रियों को कैसे लाभ होगा?

लंबी पुल और टनल वाले सेक्शन में अब पहले की तुलना में कम शुल्क लग सकता है, क्योंकि नई विधि अक्सर कम शुल्क वाली दूरी का उपयोग करती है। वास्तविक बचत प्रत्येक हाईवे की संरचनात्मक लंबाई पर निर्भर करेगी।

क्यों यह महत्वपूर्ण है

BozokMedia analysis shows that the revised formula balances the government's need to recover high construction costs with commuters' demand for affordability, potentially boosting road usage and economic activity along major corridors.

"यह कदम न केवल यात्रियों के बोझ को कम करेगा, बल्कि लंबी दूरी के व्यापार को भी प्रोत्साहित करेगा," कहते हैं ट्रांसपोर्ट इकनॉमिक्स के प्रोफेसर अजय सिंह।
क्या आप जानते हैं?: NHAI के पहले के टोल नियमों में 60 मीटर से बड़े संरचनाओं को दो गुना मल्टिप्लायर दिया जाता था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर यह नियम लागू होगा?

उत्तर: यह नियम केवल उन सेक्शन पर लागू होगा जहाँ पुल, टनल, फ़्लाईओवर या वीडक्ट जैसी बड़ी संरचनाएँ मौजूद हैं।

प्रश्न 2: टोल की बचत कितनी हो सकती है?

उत्तर: बचत का प्रतिशत प्रत्येक हाईवे की संरचना पर निर्भर करता है, लेकिन कुछ मामलों में 20‑30% तक घटाव संभव है।