सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 24 के अपने फैसले को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के बाहर किसी भी धर्म में बदलते ही अनुसूचित जाति (SC) की स्थिति तुरंत समाप्त हो जाती है। इस आदेश को चुनौती देने वाली समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया गया।
मुख्य बिंदु
- धर्म परिवर्तन पर SC स्थिति तुरंत समाप्त
- केवल हिंदू, सिख, बौद्ध ही SC लाभ रख सकते हैं
- समीक्षा याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने अस्वीकार किया
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
नई दिल्ली – 27 जुलाई, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने 24 मार्च के अपने आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि एक अनुसूचित जाति (SC) सदस्य अगर हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म में परिवर्तित होता है, तो वह तुरंत और पूरी तरह से SC स्थिति खो देता है। यह निर्णय न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और मनमोहन के पैनल द्वारा सुनाया गया।
कोर्ट ने कहा कि संविधान (अनुसूचित जातियों) आदेश, 1950 के क्लॉज़ 3 के तहत केवल तीन धर्मों को ही SC स्थिति प्रदान करने की शक्ति दी गई है। 1956 में सिखों को और 1990 में बौद्धों को शामिल किया गया, लेकिन ईसाई धर्म को कभी भी इस सूची में नहीं जोड़ा गया।
इस आदेश के बाद, किसी भी धर्म परिवर्तन के बाद SC लाभ—जैसे आरक्षण, सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता और सामाजिक सुरक्षा—स्वचालित रूप से समाप्त हो जाते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति पुनः हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म में लौटता है, तो उसे मूल SC सदस्यता का प्रमाण देना होगा।
इतिहासिक पृष्ठभूमि
1950 में जारी मूल आदेश केवल हिंदुओं को ही SC वर्ग में शामिल करता था। 1956 में संशोधन द्वारा सिखों को जोड़ा गया, और 1990 में बौद्धों को। इस बीच, कई सामाजिक संगठनों ने धर्म परिवर्तन के बाद SC स्थिति के निरंतर रहने की मांग की थी, लेकिन न्यायालय ने इस मुद्दे को स्पष्ट रूप से अस्वीकार किया।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that यह निर्णय सामाजिक समानता और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच जटिल तालमेल को उजागर करता है, और भविष्य में समान अधिकारों के लिए कानूनी चुनौतियों को और भी कठिन बना सकता है।
"धर्म परिवर्तन पर SC स्थिति का समाप्त होना सामाजिक संरचना में गहरा परिवर्तन लाएगा," कहा कानूनी विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह।
Frequently Asked Questions
क्या कोई व्यक्ति पुनः हिंदू धर्म में लौट कर SC स्थिति फिर से पा सकता है?
हाँ, लेकिन उसे मूल SC सदस्यता का स्पष्ट प्रमाण और वास्तविक पुन:धार्मिकता दिखानी होगी।
क्या यह फैसला अनुसूचित जनजातियों (ST) पर भी लागू होता है?
कोर्ट ने कहा कि ST स्थिति के लिए भी समान सिद्धांत लागू होते हैं, लेकिन यह मामले के तथ्य पर निर्भर करता है।