पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले ने बताया कि कैसे चीन एक नई वैश्विक व्यवस्था बनाने के लिए रणनीतिक कदम उठा रहा है। उन्होंने भारत-चीन सीमा पर अनिश्चितता और चीन के रूस-ईरान संबंधों के गहरे निहितार्थों पर चर्चा की।
मुख्य बातें
- चीन वैश्विक शक्ति संतुलन को बदलने के लिए रणनीतिक अनिश्चितता का उपयोग कर रहा है।
- भारत-चीन सीमा पर स्थिति चीन की दीर्घकालिक भू-राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।
- चीन, रूस और ईरान के बीच बढ़ते संबंध एक नए शक्ति ब्लॉक का संकेत देते हैं।
पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण चर्चा में खुलासा किया कि चीन केवल क्षेत्रीय विस्तार नहीं कर रहा है, बल्कि वह एक पूरी तरह से नई वैश्विक व्यवस्था (Global Order) के निर्माण के लिए आधारशिला रख रहा है। गोखले के अनुसार, चीन का लक्ष्य वर्तमान पश्चिमी-प्रधान व्यवस्था को चुनौती देना और अपनी शर्तों पर वैश्विक नेतृत्व स्थापित करना है।
गोखले ने विशेष रूप से भारत-चीन सीमा पर व्याप्त 'रणनीतिक अनिश्चितता' (Strategic Uncertainty) पर प्रकाश डाला। उन्होंने तर्क दिया कि चीन सीमा पर स्थिति को स्पष्ट करने के बजाय उसे अस्पष्ट रखना पसंद करता है, ताकि वह भारत पर मनोवैज्ञानिक और सामरिक दबाव बनाए रख सके। यह अनिश्चितता चीन के लिए एक उपकरण की तरह काम करती है, जिससे वह अपनी भू-राजनीतिक बढ़त सुनिश्चित करता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि चीन की यह रणनीति केवल सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक और कूटनीतिक भी है। चीन का रूस और ईरान के साथ गहराता सामरिक गठबंधन एक ऐसे ध्रुवीकृत विश्व की ओर इशारा कर रहा है जहाँ पश्चिमी प्रभाव कम हो सकता है। भारत के लिए, यह सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और भविष्य की विदेश नीति के संदर्भ में एक अत्यंत जटिल चुनौती पेश करता है।
चीन की रणनीति का उद्देश्य केवल सीमाओं का विस्तार करना नहीं, बल्कि वैश्विक नियमों को फिर से लिखना है।
ऐतिहासिक रूप से, चीन ने हमेशा से ही अपनी आर्थिक शक्ति का उपयोग कूटनीतिक प्रभाव बढ़ाने के लिए किया है। 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) जैसे प्रोजेक्ट्स इसी व्यापक योजना का हिस्सा रहे हैं, जो धीरे-धीरे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और राजनीतिक वफादारियों को प्रभावित कर रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. विजय गोखले कौन हैं?
विजय गोखले भारत के पूर्व विदेश सचिव और एक अनुभवी राजनयिक हैं।
2. चीन की 'रणनीतिक अनिश्चितता' क्या है?
इसका अर्थ है सीमा या अंतरराष्ट्रीय संबंधों में स्थिति को स्पष्ट न करना ताकि दूसरे देश भ्रमित और दबाव में रहें।