अमेरिकी सेना ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 'जेनस प्रोग्राम' के तहत पांच सैन्य अड्डों पर परमाणु माइक्रो-रिएक्टर स्थापित करने की घोषणा की है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 2.2 बिलियन डॉलर का बजट आवंटित किया गया है।
- अमेरिकी सेना 5 प्रमुख सैन्य अड्डों पर परमाणु माइक्रो-रिएक्टर तैनात करेगी।
- 'जेनस प्रोग्राम' के तहत 2.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया जाएगा।
- इसका उद्देश्य ग्रिड फेल होने की स्थिति में भी अड्डों को निर्बाध बिजली प्रदान करना है।
- पांच प्रमुख कंपनियों को रिएक्टरों के निर्माण और संचालन के लिए चुना गया है।
वाशिंगटन: अमेरिकी सेना ने अपनी ऊर्जा आत्मनिर्भरता और युद्धक क्षमता को बढ़ाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। सेना ने 'जेनस प्रोग्राम' (Janus Programme) के तहत पांच महत्वपूर्ण सैन्य अड्डों पर परमाणु माइक्रो-रिएक्टर स्थापित करने की योजना की घोषणा की है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य सैन्य प्रतिष्ठानों को एक विश्वसनीय और निरंतर बिजली स्रोत प्रदान करना है, जो वाणिज्यिक इलेक्ट्रिक ग्रिड के विफल होने की स्थिति में भी काम कर सके।
इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के लिए अमेरिकी सेना ने पांच कंपनियों को चुना है, जिन्हें अगले पांच वर्षों में प्रदर्शन लक्ष्यों को पूरा करने पर कुल 2.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक प्राप्त हो सकते हैं। सेना का लक्ष्य 20 से अधिक माइक्रो-रिएक्टरों का निर्माण और संचालन करना है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ट्रंप प्रशासन डेटा केंद्रों की बढ़ती मांग और सैन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए अगली पीढ़ी की परमाणु शक्ति को बढ़ावा दे रहा है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम केवल ऊर्जा सुरक्षा के बारे में नहीं है, बल्कि यह भविष्य के युद्धों में रसद (logistics) की चुनौतियों को कम करने के बारे में है। वर्तमान में, सेना डीजल जनरेटरों पर निर्भर है, जिसे संघर्ष के दौरान युद्ध क्षेत्रों तक पहुंचाना कठिन हो सकता है। परमाणु माइक्रो-रिएक्टर बिना ईंधन भरे वर्षों तक चल सकते हैं, जिससे सेना की वैश्विक परिचालन क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।
सेना के सचिव डैन ड्रिस्कल ने कहा, "हम उन ऊर्जा लचीलेपन का निर्माण कर रहे हैं जो वैश्विक स्तर पर युद्ध शक्ति प्रदर्शित करने के लिए आवश्यक हैं, बिना किसी असुरक्षित बाहरी ग्रिड पर निर्भर रहे।"
परियोजना के तहत चुने गए पांच प्रमुख स्थान और कंपनियां इस प्रकार हैं:
| सैन्य अड्डा (Base) | राज्य (State) | चुनी गई कंपनी (Company) |
|---|---|---|
| फोर्ट ब्रैग (Fort Bragg) | नॉर्थ कैरोलिना | Antares Nuclear |
| फोर्ट कैंपबेल (Fort Campbell) | केंटकी | BWXT |
| फोर्ट हुड (Fort Hood) | टेक्सास | General Atomics |
| फोर्ट बेनिंग (Fort Benning) | जॉर्जिया | Radiant Industries |
| फोर्ट ड्रम (Fort Drum) | न्यूयॉर्क | Westinghouse |
हालांकि, इस तकनीक को लेकर कुछ चिंताएं भी जताई गई हैं। आलोचकों का तर्क है कि परमाणु रिएक्टर अन्य ऊर्जा स्रोतों की तुलना में महंगे और जोखिम भरे हो सकते हैं। हालांकि, सेना के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ये रिएक्टर छोटे हैं और किसी भी विफलता की स्थिति में सुरक्षित रूप से बंद हो जाएंगे। साथ ही, परमाणु कचरे के प्रबंधन के लिए ऊर्जा विभाग के साथ समझौता किया जा रहा है ताकि अड्डों पर दीर्घकालिक भंडारण की आवश्यकता न पड़े।
Frequently Asked Questions
1. जेनस प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य उन्नत परमाणु रिएक्टर डिजाइनों को प्रोटोटाइप से निकालकर वास्तविक और दीर्घकालिक सैन्य उपयोग में लाना है।
2. क्या ये रिएक्टर ग्रिड से अलग होंगे?
नहीं, सैन्य अड्डे ग्रिड से जुड़े रहेंगे, लेकिन ये रिएक्टर बैकअप और निरंतर बिजली के रूप में काम करेंगे।