ऑल इंडिया ऑडिट एंड अकाउंट्स पेंशनर्स एसोसिएशन (AIAAPA) ने वित्त अधिनियम 2025 के उन प्रावधानों को हटाने की मांग की है जो सेवानिवृत्ति की तारीख के आधार पर पेंशनरों के बीच भेदभाव करते हैं। एसोसिएशन का कहना है कि ये नियम सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों का उल्लंघन करते हैं।
मुख्य बातें
- AIAAPA ने वित्त अधिनियम 2025 के पेंशन प्रावधानों को रद्द करने का प्रस्ताव पारित किया।
- पेंशनरों का आरोप है कि नए नियम सेवानिवृत्ति की तारीख के आधार पर भेदभाव करते हैं।
- एसोसिएशन ने पेंशन कम्यूटेशन बहाली की अवधि को घटाकर 11 वर्ष करने की मांग की है।
- सुप्रीम कोर्ट के डी.एस. नकरा मामले के फैसले को लागू करने पर जोर।
चेन्नई में आयोजित ऑल इंडिया ऑडिट एंड अकाउंट्स पेंशनर्स एसोसिएशन (AIAAPA) की पहली वार्षिक आम बैठक में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया। तमिलनाडु और पुडुचेरी चैप्टर ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह वित्त अधिनियम, 2025 के तहत पेंशन सत्यापन प्रावधानों को तत्काल प्रभाव से वापस ले।
एसोसिएशन का तर्क है कि ये प्रावधान, जो 1 जून, 1972 से पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू किए गए हैं, केंद्र सरकार को पेंशनरों के वर्गीकरण की शक्ति देते हैं। इससे उन लोगों के बीच भेदभाव पैदा होता है जो अलग-अलग तारीखों पर सेवानिवृत्त हुए हैं। पेंशनरों का कहना है कि यह कदम केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करते समय समानता के अधिकार को कमजोर करता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल पेंशन राशि का नहीं बल्कि सामाजिक सुरक्षा के संवैधानिक अधिकार का है। यदि वित्त अधिनियम के ये प्रावधान बने रहते हैं, तो यह उन न्यायिक सुरक्षा उपायों को समाप्त कर सकता है जो डी.एस. नकरा मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रदान किए गए थे। यह निर्णय पेंशनभोगियों के बीच एक कानूनी और सामाजिक दरार पैदा कर सकता है।
पेंशन अधिकार केवल एक वित्तीय लाभ नहीं, बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद गरिमापूर्ण जीवन जीने का एक सामाजिक सुरक्षा कवच है।
बैठक को संबोधित करते हुए, बीएसएनएल कर्मचारी संघ के संस्थापक महासचिव वी.ए.एन. नंबूदिरी ने कहा कि पेंशन अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष एक वैश्विक आंदोलन का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वित्त अधिनियम के प्रावधानों ने लंबे समय से चले आ रहे पेंशन अधिकारों को कमजोर कर दिया है, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा रही है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पेंशन संबंधी विवादों में डी.एस. नकरा बनाम भारत संघ मामला मील का पत्थर माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट किया था कि पेंशन केवल सेवा के बदले मिलने वाला पुरस्कार नहीं है, बल्कि यह सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए एक सामाजिक सुरक्षा का अधिकार है, जिससे उनके साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: पेंशनर्स किस कानून के खिलाफ विरोध कर रहे हैं?
उत्तर: पेंशनर्स वित्त अधिनियम, 2025 के उन प्रावधानों के खिलाफ हैं जो सेवानिवृत्ति की तारीख के आधार पर पेंशन में अंतर करते हैं।
प्रश्न 2: एसोसिएशन की अन्य प्रमुख मांगें क्या हैं?
उत्तर: एसोसिएशन ने पेंशन कम्यूटेशन बहाली की अवधि को 11 वर्ष करने और 30 जून और 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को काल्पनिक वेतन वृद्धि (notional increment) देने की मांग की है।