कर्नाटक सरकार ने किडवाई मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑन्कोलॉजी में प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह कदम पूर्व प्रशासनिक अधिकारी की शिकायत के बाद उठाया गया है।

मुख्य बातें

  • किडवाई संस्थान में वित्तीय और टेंडर संबंधी अनियमितताओं की जांच होगी।
  • पूर्व मुख्य प्रशासनिक अधिकारी आशा परवीन ने लगाए थे गंभीर आरोप।
  • सरकार ने तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है।

बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने राज्य के प्रतिष्ठित किडवाई मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑन्कोलॉजी (KMIO) में कथित प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं की जांच करने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है। यह निर्णय संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, आशा परवीन द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद लिया गया है।

आशा परवीन ने अपनी शिकायत में संस्थान के प्रशासनिक मामलों, वित्तीय लेनदेन, निविदा (टेंडर) प्रक्रियाओं और खरीद गतिविधियों में व्यापक अनियमितताओं का दावा किया है। इन आरोपों ने कैंसर उपचार के लिए राज्य के प्रमुख संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच समिति का स्वरूप

27 जुलाई के आदेश के अनुसार, सरकार ने तीन सदस्यीय पैनल नियुक्त किया है। इस समिति का नेतृत्व चिकित्सा शिक्षा निदेशालय की मुख्य प्रशासनिक अधिकारी उषा रानी करेंगी। समिति के अन्य सदस्यों में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी साइंसेज एंड ऑर्गन ट्रांसप्लांट (IGOT) के मुख्य लेखा अधिकारी विष्णु प्रसाद और नेफ्रो-यूरोलॉजी संस्थान की प्रशासनिक अधिकारी मंजुला शामिल हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, किडवाई संस्थान जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र में वित्तीय पारदर्शिता का अभाव न केवल सरकारी धन की हानि है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता को भी खतरे में डालता है। यदि टेंडर प्रक्रिया में धांधली साबित होती है, तो यह चिकित्सा उपकरणों और दवाओं की आपूर्ति को सीधे प्रभावित कर सकता है।

चिकित्सा संस्थानों में प्रशासनिक पारदर्शिता की कमी सीधे तौर पर मरीजों के जीवन और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से जुड़ी होती है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

किडवाई मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑन्कोलॉजी कर्नाटक में कैंसर के इलाज के लिए एक प्रमुख केंद्र है। दशकों से यह संस्थान राज्य के गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों के लिए जीवनरक्षक सेवाएं प्रदान करता रहा है। संस्थान की साख अब इस जांच के परिणामों पर टिकी है।

क्या आप जानते हैं?: किडवाई संस्थान कर्नाटक में ऑन्कोलॉजी (कैंसर विज्ञान) के क्षेत्र में सबसे पुराने और सबसे महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. जांच समिति का नेतृत्व कौन कर रहा है?
जांच समिति का नेतृत्व चिकित्सा शिक्षा निदेशालय की मुख्य प्रशासनिक अधिकारी उषा रानी कर रही हैं।

2. आरोप किसने लगाए हैं?
आरोप संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशासनिक अधिकारी आशा परवीन ने लगाए हैं।