इको-फ्रेंडली बैग खरीद घोटाले के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार और याचिकाकर्ता को नोटिस जारी किया है। आईएएस रोहिणी सिंदूरी ने कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसने उनके खिलाफ जांच की अनुमति मांगी थी।

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मुख्य बातें

  • सुप्रीम कोर्ट ने आईएएस रोहिणी सिंदूरी की याचिका पर कर्नाटक सरकार को नोटिस जारी किया।
  • मामला 13 रुपये के बैग को 53 रुपये में खरीदने के कथित घोटाले से जुड़ा है।
  • हाई कोर्ट के आदेश को धारा 17A के तहत जांच की मंजूरी के रूप में देखा जा रहा है।
  • कर्नाटक सरकार ने भी हाई कोर्ट के फैसले का विरोध किया है।

नई दिल्ली: कर्नाटक कैडर की वरिष्ठ IAS अधिकारी रोहिणी सिंदूरी के खिलाफ चल रहे कथित भ्रष्टाचार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक राज्य सरकार और मूल शिकायतकर्ता, दोनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

क्या है पूरा विवाद?

यह पूरा मामला मैसूरु में डिप्टी कमिश्नर के रूप में रोहिणी सिंदूरी के कार्यकाल के दौरान हुए 'इको-फ्रेंडली कपड़े के बैग' की खरीद से जुड़ा है। आरोप है कि सरकारी खजाने से 13 रुपये वाले बैग को 52-53 रुपये की दर से खरीदा गया, जिससे सरकारी धन को लगभग 7.6 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

रोहिणी सिंदूरी ने कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें राज्य सरकार को 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' (Prevention of Corruption Act) की धारा 17A के तहत उनके खिलाफ जांच की अनुमति देने का निर्देश दिया गया था।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला सरकारी अधिकारियों के आधिकारिक निर्णयों की सुरक्षा और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच की बारीक रेखा को परिभाषित करेगा। यदि सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखता है, तो यह प्रशासनिक निर्णयों की न्यायिक समीक्षा के दायरे को व्यापक बना देगा।

यह मामला यह तय करेगा कि क्या विभागीय जांच में बरी किया गया अधिकारी आपराधिक जांच के दायरे से बाहर रह सकता है या नहीं।

कानूनी पेच और सरकार का रुख

दिलचस्प बात यह है कि कर्नाटक सरकार स्वयं हाई कोर्ट के आदेश का विरोध कर रही है। सरकार का तर्क है कि विभागीय जांच में रोहिणी सिंदूरी की कोई गलती नहीं पाई गई थी, इसलिए धारा 17A के तहत जांच की अनुमति देना अनुचित है। हालांकि, हाई कोर्ट ने कहा था कि विभागीय बरी होने का उपयोग आपराधिक जांच से बचने के लिए नहीं किया जा सकता।

क्या आप जानते हैं?: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A सरकारी अधिकारियों को उनके आधिकारिक कर्तव्यों के निष्पादन के दौरान लिए गए निर्णयों के खिलाफ जांच से सुरक्षा प्रदान करती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. रोहिणी सिंदूरी पर क्या आरोप हैं?
उन पर मैसूरु में कम कीमत वाले कपड़े के बैग को अत्यधिक कीमत पर खरीदने का आरोप है, जिससे सरकारी नुकसान हुआ।

2. धारा 17A क्या है?
यह धारा लोक सेवकों के खिलाफ उनके आधिकारिक कार्यों के लिए जांच शुरू करने से पहले सरकारी अनुमति की आवश्यकता सुनिश्चित करती है।