28 अगस्त को रक्षा बंधन के दिन 5 घंटे 39 मिनट तक चलने वाला चंद्र ग्रहण होगा, जिसमें चाँद लाल रंग में दिखेगा। भारत में इस ग्रहण का कोई सूतक काल नहीं है, इसलिए राखी बाँधने पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

मुख्य बिंदु

  • 28 अगस्त को 5 घंटे 39 मिनट तक चंद्र ग्रहण
  • चाँद लाल (ब्लड मोन) रंग में दिखेगा
  • भारत में सूतक काल नहीं, राखी पर कोई असर नहीं

चंद्र ग्रहण का विस्तृत समय‑सारणी

रक्षा बंधन के दिन, 28 अगस्त को सुबह 6:32 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक चंद्र ग्रहण रहेगा। कुल अवधि 5 घंटे 39 मिनट की है, लेकिन यह समय भारत में दिन के प्रकाश में रहेगा, इसलिए ग्रहण का दृश्य प्रभाव सीमित रहेगा।

भारत में राखी पर प्रभाव

ग्रहण भारत में नहीं होगा, इसलिए राखी बंधने की परंपरा में कोई बदलाव या बाधा नहीं आएगी। पूर्णिमा 27 अगस्त को 8:31 बजे समाप्त होगी और 28 अगस्त को सुबह 9:18 बजे तक जारी रहेगी, जिससे राखी का उत्सव पूरे दिन सुरक्षित रहेगा।

दुनिया भर में दृश्यता

यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका और पश्चिमी एशिया के कुछ हिस्सों में यह ग्रहण स्पष्ट दिखेगा। विशेषकर अमेरिका में ब्लड मोन का नजारा काफी नाटकीय होगा, जबकि भारत में कोई दृश्य प्रभाव नहीं होगा।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ज्यों‑ज्यों आधुनिक जीवन में ज्योतिषीय घटनाओं को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, ऐसे में इस तरह के बड़े खगोलीय घटनाक्रम को सही जानकारी के साथ प्रस्तुत करना सामाजिक विश्वास को स्थिर रखता है।

"लॉन्ग‑टर्म जियो‑सैक्रल प्रभावों की चर्चा अक्सर मिथक बनती है, पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह स्पष्ट है कि भारत में इस ग्रहण का कोई व्यावहारिक असर नहीं होगा," कहते हैं ज्योतिष शास्त्र विशेषज्ञ डॉ. रवींद्र मिश्रा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पिछले दशकों में कई प्रमुख भारतीय त्यौहारों के दौरान चंद्र ग्रहण देखे गए हैं, परन्तु सामाजिक रिवाजों पर उनका प्रभाव न्यूनतम रहा है। उदाहरण के तौर पर, 2015 में दशहरा के समय हुआ ग्रहण भी धार्मिक अनुष्ठानों में कोई बाधा नहीं बना।

क्या आप जानते हैं?: ब्लड मोन का रंग मुख्यतः पृथ्वी की वायुमंडलीय कणों द्वारा सूर्य के लाल प्रकाश के बिखराव से उत्पन्न होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  • क्या इस ग्रहण से मेरे स्वास्थ्य पर कोई असर पड़ेगा? नहीं, वैज्ञानिक प्रमाणों से यह सिद्ध है कि केवल दृश्य प्रभाव ही रहता है।
  • क्या राखी बांधने का समय बदलना चाहिए? बिल्कुल नहीं, राखी बाँधने की पारम्परिक तिथि अपरिवर्तित रहेगी।