सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत लाखों पात्र लाभार्थियों की पेंशन रोके जाने के विरोध में SUCI(C) 31 अगस्त को धारवाड़ में एक विशाल जन विरोध प्रदर्शन आयोजित करेगा। पार्टी ने सरकार से पेंशन को तुरंत बहाल करने और अव्यावहारिक पात्रता नियमों को बदलने की मांग की है।

  • 31 अगस्त को धारवाड़ में कलाभवन मैदान से उपायुक्त कार्यालय तक विरोध रैली।
  • कर्नाटक में लगभग 18 लाख लाभार्थियों की पेंशन 'सत्यापन' के नाम पर निलंबित।
  • ₹32,000 की वार्षिक आय सीमा को अव्यावहारिक बताकर हटाने की मांग।
  • दस्तावेजों के संग्रह के लिए घर-घर जाकर सत्यापन की मांग।

धारवाड़, कर्नाटक: समाजवादी एकता केंद्र ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) [SUCI(C)] ने राज्य सरकार के उस फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिसके तहत विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत मिलने वाली पेंशन को निलंबित कर दिया गया है। पार्टी के राज्य समिति सदस्य राममंजनाप्पा अल्डल्ली ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि पिछले पांच महीनों से लाखों लाभार्थियों की पेंशन केवल 'रिकॉर्ड पुन: सत्यापन' के नाम पर रोकी गई है।

इस निलंबन का सबसे अधिक प्रभाव समाज के सबसे कमजोर वर्गों पर पड़ा है। इसमें बुजुर्ग, विधवाएं, दिव्यांग व्यक्ति, अविवाहित महिलाएं और ट्रांसजेंडर समुदाय शामिल हैं। अल्डल्ली के अनुसार, ये लोग अपनी बुनियादी जरूरतों, दवाओं और दैनिक जीवनयापन के लिए पूरी तरह से इस मासिक पेंशन पर निर्भर हैं।

सत्यापन प्रक्रिया की विसंगतियां

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पूरे कर्नाटक में 18 लाख लाभार्थियों को 'संदिग्ध' श्रेणी में रखा गया है, जिनमें अकेले धारवाड़ जिले के 36,000 लोग शामिल हैं। सरकार ने इन लोगों से एक निश्चित समय सीमा के भीतर दस्तावेज जमा करने को कहा है। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता की कमी के कारण लोग यह समझने में असमर्थ हैं कि उन्हें वास्तव में किन दस्तावेजों की आवश्यकता है।

"पेंशन केवल एक वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि समाज के वंचित वर्गों के लिए सम्मानजनक जीवन जीने का एकमात्र सहारा है; इसे प्रशासनिक जटिलताओं की भेंट नहीं चढ़ाया जाना चाहिए।"

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि एक गहरे नीतिगत संकट को दर्शाता है। जब सरकार ₹32,000 की वार्षिक आय सीमा तय करती है, तो वह जमीनी हकीकत को नजरअंदाज करती है। मनरेगा के तहत 100 दिन काम करने वाला मजदूर भी इस सीमा को पार कर जाता है, जिससे वास्तव में जरूरतमंद लोग योजना से बाहर हो जाते हैं। यह डिजिटल डिवाइड और नौकरशाही की कठोरता का एक स्पष्ट उदाहरण है।

पार्टी ने मांग की है कि बीपीएल (BPL) राशन कार्ड को ही पात्रता का मुख्य आधार माना जाए और प्रत्येक पंचायत में सत्यापन के लिए समर्पित स्टाफ नियुक्त किया जाए।

क्या आप जानते हैं?: कर्नाटक की सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाएं भारत की सबसे व्यापक योजनाओं में से एक मानी जाती हैं, जो लाखों वरिष्ठ नागरिकों को वित्तीय स्वतंत्रता प्रदान करती हैं।

Frequently Asked Questions

1. SUCI(C) का विरोध प्रदर्शन कब और कहां होगा?
विरोध प्रदर्शन 31 अगस्त को सुबह 11 बजे धारवाड़ के कलाभवन मैदान से शुरू होकर उपायुक्त कार्यालय तक जाएगा।

2. मुख्य मांगें क्या हैं?
मुख्य मांगों में ₹32,000 की आय सीमा को हटाना, बीपीएल कार्ड को आधार बनाना और घर-घर जाकर दस्तावेजों का सत्यापन करना शामिल है।