गुरु पूर्णिमा पर दो पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा नाना पाटोले के पैर दूध से धोने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। पाटोले ने कहा कि वह आम तौर पर ऐसी प्रथा को मंजूरी नहीं देते, लेकिन इस बार कर्मचारियों के आग्रह पर किया। इस घटना ने बीजेपी को कांग्रेस की संस्कृति पर सवाल उठाने का मौका दिया।

Key Takeaways

  • वीडियो में दो कांग्रेस कार्यकर्ता नाना पाटोले के पैर दूध से धोते दिखे।
  • पाटोले ने कहा कि वह सामान्यतः इस तरह की प्रथा को मंजूरी नहीं देते।
  • बीजेपी ने इस घटना को कांग्रेस संस्कृति की आलोचना के लिए इस्तेमाल किया।

वीडियो की घटना

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पाटोले को दो कार्यकर्ता उनके पैर दूध से धोते दिखाए गए। पाटोले उस क्षण मोबाइल फोन पर लगे रहे, जबकि कार्यकर्ता फूलों की पंखुड़ियों से उन्हें सजाते रहे।

पाटोले का सार्वजनिक बयान

पाटोले ने भारतीय एक्सप्रेस को बताया कि वह आम तौर पर ऐसी प्रथा को समर्थन नहीं देते, लेकिन उनके कार्यकर्ता, जिन्हें वह अपने परिवार का सदस्य मानते हैं, ने आग्रह किया। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ एक भावनात्मक इशारा था, मैं इसे मंजूरी नहीं देता, पर यह मेरे कर्मचारियों का परिवार जैसा है।”

बीजेपी की प्रतिक्रिया

बिल्कुल इस बीच, भाजपा ने इस वीडियो को “कांग्रेस संस्कृति” की आलोचना के लिए उपयोग किया। मंत्री चंद्रशेखर बवंकुले ने कहा, “लीडर पाटोले अपने फोन में लगे रहे, जबकि उनके कार्यकर्ता उनके पैर धो रहे हैं। यह कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की स्थिति को दर्शाता है।”

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

गुरु पूर्णिमा पर पादरी और राजनेता द्वारा पैर धोना भारत में प्राचीन परम्परा है, जिसका उद्देश्य सम्मान और विनम्रता दिखाना है। परन्तु आधुनिक राजनीति में इस परम्परा को अक्सर प्रतीकात्मक रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जिससे सार्वजनिक धारणा में बदलाव आ सकता है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that इस तरह की धार्मिक‑राजनीतिक प्रतीकात्मकता चुनावी माहौल में मतदाता भावनाओं को प्रभावित कर सकती है, विशेषकर जब विरोधी दल इसे सांस्कृतिक आलोचना के रूप में प्रस्तुत करता है।

"राजनीति में धार्मिक रीति‑रिवाज़ों का उपयोग अक्सर दर्शकों के भावनात्मक जुड़ाव को बढ़ाता है, लेकिन यह विभाजन की भी सीमा खींच सकता है," कहा राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर अजय मेहता ने।
Did You Know?: गुरु पूर्णिमा पर पादरी द्वारा पैर धोना 12वीं शताब्दी के सूफी संप्रदाय में भी प्रचलित था।

Frequently Asked Questions

क्या यह घटना कांग्रेस के भीतर सामान्य है? इस तरह की परम्पराएँ कुछ क्षेत्रों में सीमित रूप से देखी जाती हैं, परन्तु सभी नेताओं द्वारा नहीं अपनाई जातीं।

क्या इस वीडियो ने चुनावी परिणामों को प्रभावित किया? अभी तक कोई स्पष्ट सर्वेक्षण नहीं है, लेकिन राजनीतिक टिप्पणीकारों ने कहा कि यह भाजपा के लिए आलोचनात्मक अवसर बन गया है।