सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि फसल नुकसान के नाम पर राज्य हाथी गलियारों में बाधाएं नहीं डाल सकते। अदालत ने केंद्र सरकार को देशभर में ऐसे अवरोधों की जांच के लिए सर्वेक्षण का आदेश दिया है।
- सुप्रीम कोर्ट ने हाथी गलियारों में किसी भी प्रकार के भौतिक अवरोध या ब्लॉकेड लगाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है।
- केंद्र सरकार (MoEFCC) को 6 सप्ताह के भीतर देशभर में अवरोधों की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश।
- हाथियों को खदेड़ने के लिए आग के गोलों (Fireballs) और मशालों के उपयोग पर सख्त पाबंदी।
- अदालत ने स्पष्ट किया कि वन्यजीवों के प्राकृतिक मार्ग को बाधित करना स्वीकार्य नहीं है।
नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सोमवार को यह आदेश दिया कि कोई भी राज्य सरकार हाथी गलियारों (Elephant Corridors) में अवरोध या बाधाएं उत्पन्न नहीं कर सकती। मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वन्यजीवों के मार्ग में बाधा डालना पूरी तरह से अस्वीकार्य है।
अदालत ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) को निर्देश दिया है कि वह एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण आयोजित करे ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन राज्यों ने हाथियों के प्राकृतिक रास्तों में बाधाएं खड़ी की हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल फसल की बर्बादी या आजीविका के नुकसान का हवाला देकर हाथियों के रास्तों को बंद नहीं किया जा सकता।
क्यों है यह मामला गंभीर?
न्यायमूर्ति बागची ने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां आग के गोलों और नुकीले स्पाइक्स का उपयोग करने की प्रथा प्रचलित है। इसका कारण यह है कि हाथी नेपाल से आते हैं और पश्चिम बंगाल के रास्ते झारखंड और अन्य राज्यों की ओर बढ़ते हैं। इसी तरह, CJI कांत ने हरियाणा के यमुनानगर क्षेत्र का उदाहरण दिया, जहां से हाथी उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की यात्रा करते हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) भारत में एक गंभीर समस्या बन चुका है। जब प्राकृतिक गलियारे अवरुद्ध होते हैं, तो हाथी बस्तियों की ओर मुड़ते हैं, जिससे जान-माल की हानि होती है। सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप केवल पशु अधिकारों के बारे में नहीं है, बल्कि यह पारिस्थितिक संतुलन और मानव सुरक्षा सुनिश्चित करने की एक दीर्घकालिक रणनीति है।
वन्यजीव गलियारों का संरक्षण केवल हाथियों के लिए नहीं, बल्कि पूरे जैव-विविधता तंत्र के अस्तित्व के लिए अनिवार्य है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और कार्यकर्ता प्रेरणा सिंह बिंद्रा ने तर्क दिया कि हाथियों को 'भीड़' की तरह खदेड़ा जाता है, जिससे समस्या और बढ़ जाती है। उन्होंने मांग की कि आग्नेयास्त्रों, आग के गोलों और मशालों के उपयोग को पूरी तरह रोका जाए। कोर्ट ने इस बात पर सहमति जताई और केंद्र से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
अदालत ने 2018 के अपने पुराने आदेशों का संदर्भ देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों को पहले ही निर्देश दिए गए थे कि वे क्रूर तकनीकों का उपयोग न करें। हाल ही में झाड़ग्राम में एक घटना का जिक्र हुआ जहां 'हुल्ला पार्टियों' द्वारा हाथियों पर मशालें फेंकी गईं, जिसे अदालत ने अत्यंत दुखद और गैरकानूनी माना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: हाथी गलियारा (Elephant Corridor) क्या होता है?
उत्तर: यह वह संकीर्ण भू-भाग होता है जो दो बड़े आवासों को जोड़ता है और हाथियों को भोजन और प्रजनन के लिए सुरक्षित आवाजाही की सुविधा देता है।
प्रश्न 2: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कितना समय दिया है?
उत्तर: कोर्ट ने केंद्र सरकार को सर्वेक्षण करने और अपनी व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 6 सप्ताह का समय दिया है।