केरल सरकार ने राज्य में आयुर्वेद, होम्योपैथी और अन्य आयुष प्रणालियों के लिए एक स्वतंत्र विश्वविद्यालय स्थापित करने की दिशा में कदम उठाए हैं। इसके लिए एक चार सदस्यीय समिति का गठन किया गया है जो जल्द ही मसौदा कानून तैयार करेगी।

मुख्य बिंदु

  • केरल में आयुर्वेद, होम्योपैथी, सिद्ध और यूनानी जैसी प्रणालियों के लिए एक स्वतंत्र आयुष विश्वविद्यालय बनेगा।
  • एक चार सदस्यीय समिति ड्राफ्ट लेजिस्लेशन (मसौदा कानून) तैयार करने के लिए गठित की गई है।
  • विश्वविद्यालय का मुख्यालय त्रिपुनितुरा स्थित आयुर्वेद मौलिक अनुसंधान स्कूल में होगा।
  • इसका उद्देश्य शिक्षा, अनुसंधान और दवा विकास को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाना है।

केरल सरकार ने राज्य की आयुष चिकित्सा प्रणालियों में शिक्षा, अनुसंधान, नैदानिक सेवाओं और दवा विकास के समन्वय के लिए एक स्वतंत्र आयुष विश्वविद्यालय स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने मंगलवार को आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय के लिए मसौदा कानून तैयार करने हेतु एक चार सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।

समिति का गठन और संरचना

इस महत्वपूर्ण समिति की अध्यक्षता आयुष विभाग के प्रधान सचिव करेंगे, जबकि राष्ट्रीय आयुष मिशन के राज्य मिशन निदेशक इसके संयोजक होंगे। समिति के अन्य सदस्यों में आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षा के निदेशक और सरकारी होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल शामिल हैं। यह समिति मौजूदा शैक्षणिक ढांचे, अनुसंधान परियोजनाओं और प्रशासनिक ढांचे का गहन अध्ययन करने के बाद दो महीने के भीतर विधेयक का मसौदा पेश करेगी।

क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम केरल के पारंपरिक चिकित्सा क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। वर्तमान में, सभी आयुष संस्थान केरल स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के अंतर्गत आते हैं। एक स्वतंत्र विश्वविद्यालय के आने से ये सभी संस्थान एक ही छत्र के नीचे आ जाएंगे, जिससे शैक्षणिक सहयोग और शोध के अवसरों में भारी वृद्धि होगी।

स्वतंत्र आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना से पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक पहचान मिलेगी और शोध के नए द्वार खुलेंगे।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में आयुष (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) का महत्व सदियों पुराना है। केरल हमेशा से आयुर्वेद के वैश्विक केंद्र के रूप में जाना जाता रहा है। इस नए विश्वविद्यालय के माध्यम से सरकार का लक्ष्य इन प्रणालियों को आधुनिक वैज्ञानिक मानकों के साथ जोड़ना है ताकि इनका वैश्विक स्तर पर विस्तार किया जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. प्रस्तावित आयुष विश्वविद्यालय का मुख्यालय कहाँ होगा?
प्रस्तावित विश्वविद्यालय त्रिपुनितुरा में स्थित आयुर्वेद मौलिक अनुसंधान स्कूल (School of Fundamental Research in Ayurveda) में आधारित होगा।

2. इस विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य आयुष शिक्षा, अनुसंधान, नैदानिक अध्ययन और दवा विकास के मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक उठाना है।