तमिलनाडु सरकार ने आगामी पांच वर्षों में 3,000 मंदिरों के जीर्णोद्धार और 84 मंदिर रथों की मरम्मत के लिए बड़े बजट की घोषणा की है। हिंदू धार्मिक और धर्मार्थendowments (HR&CE) विभाग को ₹708 करोड़ का भारी-भरकम फंड दिया गया है।
मुख्य बातें
- 5 वर्षों में 3,000 मंदिरों में 'थिरुकुडमुलुक्कू' (पवित्र अभिषेक) किया जाएगा।
- HR&CE विभाग के लिए ₹708 करोड़ का आवंटन।
- 1,000 साल से पुराने 213 मंदिरों के संरक्षण के लिए ₹418 करोड़ खर्च होंगे।
- 9,205 मंदिरों में ट्रस्टियों की नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है।
तमिलनाडु की वित्त मंत्री मारी विल्सन ने विधानसभा में संशोधित बजट पेश करते हुए राज्य की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को संरक्षित करने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है। सरकार ने अगले पांच वर्षों की अवधि के भीतर 3,000 मंदिरों के जीर्णोद्धार और उनमें 'थिरुकुडमुलुक्कू' (पवित्र अभिषेक) करने का लक्ष्य रखा है।
इस योजना के तहत न केवल मंदिरों की संरचना का सुधार किया जाएगा, बल्कि 84 मंदिर रथों का भी पुनरुद्धार किया जाएगा। इसके अलावा, जिन मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, वहां बुनियादी सुविधाओं जैसे सुरक्षित पेयजल, विश्राम गृह, शौचालय और आवास की व्यवस्था को आधुनिक बनाया जाएगा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह निर्णय?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्राचीन मंदिरों का संरक्षण न केवल आस्था को बनाए रखता है, बल्कि राज्य की ऐतिहासिक पहचान को भी सुरक्षित करता है।
प्राचीन मंदिरों का संरक्षण राज्य की सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था और विरासत को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
बजट के विवरण के अनुसार, HR&CE विभाग के लिए कुल ₹708 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इसमें से एक महत्वपूर्ण हिस्सा ₹418 करोड़ उन 213 मंदिरों के संरक्षण के लिए समर्पित है जो 1,000 वर्ष से भी अधिक पुराने हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
तमिलनाडु सदियों से द्रविड़ वास्तुकला और भव्य मंदिर परंपराओं का केंद्र रहा है। चोल, पल्लव और पांड्य राजवंशों द्वारा निर्मित ये मंदिर न केवल पूजा स्थल हैं, बल्कि कला और इतिहास के जीवंत प्रमाण भी हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. सरकार ने मंदिरों के लिए कितना बजट आवंटित किया है?
सरकार ने HR&CE विभाग के लिए ₹708 करोड़ आवंटित किए हैं।
2. प्राचीन मंदिरों के संरक्षण पर कितना खर्च होगा?
1,000 साल से पुराने 213 मंदिरों के संरक्षण के लिए ₹418 करोड़ का प्रावधान किया गया है।