थुगलक पत्रिका के संपादक एस. गुरुमूर्ति ने चेन्नई में आयोजित एक विशेष व्याख्यान में कहा कि भारत में 'जेन ज़ी' को विद्रोह के लिए तैयार किया जा रहा है, जबकि पश्चिम में वे परंपराओं की ओर लौट रहे हैं। उन्होंने भारतीय सभ्यता को भविष्य का मार्गदर्शक बताया।

मुख्य बातें

  • एस. गुरुमूर्ति ने भारतीय और पश्चिमी 'जेन ज़ी' (Gen Z) के व्यवहार में अंतर बताया।
  • उन्होंने कहा कि भारत में युवाओं को परंपराओं और समाज के खिलाफ विद्रोह करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
  • भारतीय सभ्यता को ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाने वाली कुंजी बताया गया।
  • भारतीय बचत संस्कृति का आधार भविष्य की पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी है।

चेन्नई के कामराजर अरंगम में आयोजित YGP शताब्दी वर्ष स्मृति व्याख्यान के दौरान, थुगलक पत्रिका के संपादक और विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के अध्यक्ष एस. गुरुमूर्ति ने भारतीय सभ्यता की शक्ति और वर्तमान पीढ़ी के बदलते स्वरूप पर गहन विचार साझा किए। उन्होंने 'भारतीय सभ्यता: अतीत का गौरव या भविष्य का मार्गदर्शक' विषय पर बोलते हुए वैश्विक रुझानों और भारतीय मूल्यों के बीच के अंतर को रेखांकित किया।

गुरुमूर्ति ने एक चौंकाने वाला विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए कहा कि जहाँ यूरोप, जापान और अमेरिका में 'जेन ज़ी' (Gen Z) पीढ़ी पुरानी संगीत और साहित्य की ओर आकर्षित हो रही है, वहीं भारत में इस पीढ़ी को जानबूझकर 'विद्रोही' के रूप में गढ़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि पश्चिमी संचार विशेषज्ञों का उपभोक्तावादी दृष्टिकोण भारतीय युवाओं को उनके माता-पिता, समाज, परंपरा और धर्म के खिलाफ खड़ा कर रहा है।

क्यों यह महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, गुरुमूर्ति का यह बयान सांस्कृतिक साम्राज्यवाद के बढ़ते प्रभाव की ओर इशारा करता है। यदि युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से कट जाती है, तो समाज की निरंतरता खतरे में पड़ सकती है। भारतीय सभ्यता केवल इतिहास नहीं, बल्कि एक जीवित परंपरा है जो भविष्य के संकटों, जैसे जलवायु परिवर्तन और ब्रह्मांडीय रहस्यों, का समाधान प्रदान कर सकती है।

सभ्यता का अर्थ है निरंतरता; सभ्यता का अर्थ है लोगों की स्मृति।

उन्होंने भारतीय बचत संस्कृति की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों के विपरीत, भारत में लोग अपने लिए नहीं, बल्कि अपने पोते-पोतियों के भविष्य के लिए बचत करते हैं। यह व्यवहार भारतीय समाज में गहरे सामाजिक और पारिवारिक जुड़ाव को दर्शाता है, जो पश्चिमी व्यक्तिवाद से बिल्कुल अलग है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

PSBB ग्रुप ऑफ स्कूल्स द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम स्वर्गीय श्रीमती YGP की स्मृति में किया गया। PSBB ने दशकों से भारतीय परंपरा और प्रगतिशील सोच के संगम के रूप में अपनी पहचान बनाई है, जहाँ शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण भी है।

क्या आप जानते हैं?: भारतीय सभ्यता दुनिया की सबसे पुरानी निरंतर जीवित रहने वाली सभ्यताओं में से एक है, जो आज भी आधुनिक विज्ञान और जीवन पद्धति को प्रभावित कर रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. एस. गुरुमूर्ति ने जेन ज़ी (Gen Z) के बारे में क्या चिंता जताई?
उन्होंने कहा कि भारत में जेन ज़ी को परंपराओं और समाज के खिलाफ विद्रोह करने वाले व्यक्ति के रूप में 'बनाया' जा रहा है।

2. भारतीय सभ्यता के बारे में गुरुमूर्ति का क्या दृष्टिकोण है?
उनके अनुसार, भारतीय सभ्यता भविष्य का मार्गदर्शक है और ब्रह्मांड के कई रहस्यों को सुलझाने की क्षमता रखती है।