महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) दूध की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वाकांक्षी डिजिटलीकरण परियोजना शुरू कर रहा है। इस प्रणाली के माध्यम से दूध के उत्पादन से लेकर उपभोक्ता तक पहुँचने तक की पूरी प्रक्रिया को ट्रैक किया जा सकेगा।
मुख्य बातें
- दूध की शुद्धता जांचने के लिए 'एन्ड-टू-एंड' डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम लागू होगा।
- दूध के उत्पादन को सीधे पशुओं (Milch Animals) के डेटा से जोड़ा जाएगा।
- NDLM डेटाबेस का उपयोग करके मिलावट की पहचान की जाएगी।
- दूध के संग्रह और चिलिंग केंद्रों की निगरानी के लिए एक नया पोर्टल बनेगा।
महाराष्ट्र में दूध में होने वाली मिलावट की बार-बार होने वाली घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए, राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने एक व्यापक डिजिटलीकरण पहल की योजना बनाई है। इस परियोजना का उद्देश्य दूध की 'एन्ड-टू-एंड' ट्रैसेबिलिटी (traceability) सुनिश्चित करना है, जिससे दूध के उत्पादन से लेकर वितरण तक की हर गतिविधि पर नज़र रखी जा सके।
FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने बताया कि इस परियोजना के तहत एक विशेष पोर्टल विकसित किया जाएगा। सभी दूध संग्रह केंद्रों को इस पोर्टल पर अपना डेटा अपलोड करना अनिवार्य होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस डेटा को नेशनल डिजिटल लाइवस्टॉक मिशन (NDLM) के पशु डेटा के साथ बैक-एंड पर मिलाया जाएगा। इससे अधिकारियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि क्या किसी क्षेत्र में दूध का उत्पादन और वहां से एकत्र किया गया दूध आपस में मेल खाते हैं या नहीं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि दूध में मिलावट अक्सर तब होती है जब दूध को दो घंटे के भीतर ठंडा (chilling) नहीं किया जाता है। जब दूध की अम्लता (acidity) बढ़ती है, तो उसे संतुलित करने के लिए मिलावटखोर न्यूट्रलाइज़र, पानी या फैट बढ़ाने वाले पदार्थों का उपयोग करते हैं। यह नई डिजिटल प्रणाली इस 'मिलावट चक्र' को तोड़ने में सक्षम होगी।
"जब तक हम दूध को सीधे दुधारू पशुओं से नहीं जोड़ पाते, तब तक हम मिलावट को पूरी तरह समाप्त नहीं कर सकते।" - तुकाराम मुंडे, FDA कमिश्नर
वर्तमान में, FDA ने राज्य में एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगाने और स्कूलों के आसपास जंक फूड की बिक्री रोकने जैसे कड़े कदम उठाए हैं। इस नई पहल के माध्यम से, प्रशासन का लक्ष्य दूध की गुणवत्ता और मात्रा दोनों की वास्तविक समय (real-time) में निगरानी करना है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में पशुधन प्रबंधन के लिए नेशनल डिजिटल लाइवस्टॉक मिशन (NDLM) पहले से ही काम कर रहा है, जहाँ पशुओं की टैगिंग की जाती है। महाराष्ट्र FDA अब इसी आधार का उपयोग करके खाद्य सुरक्षा के एक नए युग की शुरुआत करने जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. यह डिजिटल ट्रैकिंग कैसे काम करेगी?
यह पशुओं के उत्पादन डेटा और डेयरी केंद्रों के संग्रह डेटा को आपस में मिलाकर मिलावट की पहचान करेगी।
2. क्या यह डेटा आम जनता के लिए उपलब्ध होगा?
नहीं, यह डेटा केवल FDA के बैक-एंड पर उपलब्ध होगा ताकि निगरानी गुप्त और प्रभावी बनी रहे।