पूर्व रक्षा प्रमुख जनरल अनिल चौहान ने खुलासा किया है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान इस्तेमाल किया गया एक 'लॉइटरिंग म्यूनिशन' पाकिस्तान के किराना हिल्स में गिर सकता है, जो उनके परमाणु ठिकानों का केंद्र है। उन्होंने पाकिस्तानी रक्षा क्षमताओं और चीन के साथ उनके संबंधों पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।

  • पूर्व सीडीएस अनिल चौहान के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एक भारतीय ड्रोन/म्यूनिशन पाकिस्तान के परमाणु केंद्र (किराना हिल्स) के पास गिरा हो सकता है।
  • लॉइटरिंग म्यूनिशन का उद्देश्य रडार का पता लगाना था, लेकिन लक्ष्य न मिलने पर वे अनियंत्रित होकर गिर सकते हैं।
  • चौहान ने पाकिस्तान की खुफिया जानकारी और समुद्री निगरानी क्षमताओं में भारी विफलता का उल्लेख किया।
  • चीन की भूमिका पर उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सैन्य प्लेटफॉर्म का बड़ा हिस्सा चीनी मूल का है।

नई दिल्ली में आयोजित विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के एक कार्यक्रम में, पूर्व रक्षा प्रमुख (CDS) जनरल अनिल चौहान (सेवानिवृत्त) ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने एक चौंकाने वाला संकेत दिया कि भारत द्वारा भेजे गए 'लॉइटरिंग म्यूनिशन' (Loitering Munitions) में से एक संभवतः पाकिस्तान के किराना हिल्स क्षेत्र में गिरा होगा।

किराना हिल्स और परमाणु खतरा

जनरल चौहान ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने सरगोधा और किराना हिल्स के आसपास रडार की तलाश में कई लॉइटरिंग म्यूनिशन भेजे थे। किराना हिल्स, जो सरगोधा से लगभग 10 किमी उत्तर में स्थित है, पाकिस्तान के संवेदनशील परमाणु ठिकानों का मुख्य केंद्र माना जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन हथियारों की एक निश्चित 'लाइफटाइम' होती है; यदि वे दो घंटे तक अपना लक्ष्य (जैसे रडार) नहीं ढूंढ पाते, तो वे स्वतः ही नीचे गिर जाते हैं।

चौहान ने आगे कहा, "यह संभव है कि वह किसी पहाड़ी पर गिरा हो। यही कारण हो सकता है कि पाकिस्तानी मीडिया ने किराना हिल्स से धुआं निकलते हुए कुछ तस्वीरें दिखाई थीं।" हालांकि, उन्होंने इस बात की पुष्टि नहीं की कि भारत ने जानबूझकर परमाणु केंद्रों को निशाना बनाया था, जैसा कि एयर मार्शल ए के भारती ने पहले स्पष्ट किया था।

BozokMedia विश्लेषण: पाकिस्तान की रणनीतिक विफलता

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि पाकिस्तान की सैन्य खुफिया प्रणाली न केवल अक्षम है, बल्कि भ्रामक सूचनाओं पर भी निर्भर है। जनरल चौहान ने बताया कि पाकिस्तान अक्सर भारतीय नौसेना के 'कैरियर बैटल ग्रुप' की गलत स्थिति बताता था। जब पश्चिमी नौसेना कमान से इसकी जांच की गई, तो भारतीय बेड़ा पाकिस्तानी दावों से 100 से 300 समुद्री मील दूर था। यह दर्शाता है कि पाकिस्तान अपनी समुद्री सुरक्षा के लिए विदेशी स्रोतों पर अत्यधिक निर्भर है और उसके पास अपनी सटीक निगरानी क्षमता का अभाव है।

"पाकिस्तान की समझ स्थिति के प्रति बहुत खराब है, विशेष रूप से समुद्री डोमेन में, जहां वे विदेशी इनपुट पर अत्यधिक निर्भर हैं।"

चीन-पाकिस्तान संबंध और तकनीकी निर्भरता

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए, चौहान ने कहा कि पाकिस्तान के 70% से 80% सैन्य प्लेटफॉर्म चीनी मूल के हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि युद्ध के दौरान इन उपकरणों का रखरखाव करने के लिए चीनी मूल उपकरण निर्माता (OEM) भी वहां मौजूद हो सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान ने चीनी उपग्रहों की मदद लेने की कोशिश की, लेकिन वे सटीक लक्ष्य भेदने में विफल रहे।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

किराना हिल्स और सरगोधा का क्षेत्र दशकों से भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव का केंद्र रहा है। पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम का एक बड़ा हिस्सा इसी भौगोलिक क्षेत्र के आसपास केंद्रित है, जो इसे किसी भी संभावित संघर्ष में अत्यधिक संवेदनशील बनाता है।

Did You Know?: लॉइटरिंग म्यूनिशन को 'आत्मघाती ड्रोन' भी कहा जाता है क्योंकि वे हवा में मंडरा सकते हैं और लक्ष्य मिलते ही उस पर हमला कर देते हैं।

Frequently Asked Questions

1. क्या भारत ने जानबूझकर पाकिस्तान के परमाणु केंद्रों पर हमला किया?
नहीं, जनरल चौहान के अनुसार, म्यूनिशन रडार खोजने के लिए भेजे गए थे, और लक्ष्य न मिलने पर वे अनियंत्रित होकर गिर सकते हैं।

2. ऑपरेशन सिंदूर क्या था?
यह भारत द्वारा पाकिस्तान के सैन्य और रडार नेटवर्क को निशाना बनाने के लिए चलाया गया एक महत्वपूर्ण सैन्य अभियान था।