दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर तरनजीत सिंह संधु ने दीर्घकालिक पदस्थ अधिकारियों को स्थानांतरित करने और संवेदनशील विभागों की सूची को पुनःपरिभाषित करने का आदेश जारी किया है। यह कदम पिछले दो दिनों में हुए बड़े प्रशासनिक पुनर्गठन के बाद आया है, जिसमें 16 आईएएस एवं डैनिकस अधिकारियों को बदला गया।

मुख्य बिंदु

  • पाँच साल से अधिक समय तक एक ही पद पर रहे अधिकारियों को स्थानांतरित किया जाएगा।
  • संवेदनशील विभागों की सूची को वित्तीय आवंटन के अनुसार पुनःनिर्धारित किया जाएगा।
  • सभी संवेदनशील विभागों में तुरंत मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) की नियुक्ति अनिवार्य की गई है।

दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर तरनजीत सिंह संधु ने आधिकारिक रूप से निर्देश जारी किया कि जो अधिकारी एक ही पद पर लंबी अवधि तक रहे हैं, उन्हें तुरंत स्थानांतरित किया जाए। यह आदेश पिछले दो दिन में हुए प्रशासनिक पुनर्गठन के बाद आया, जिसमें शहरी विकास, वित्त, पर्यावरण, शिक्षा, खाद्य सुरक्षा और परिवहन विभागों में 16 आईएएस और डैनिकस अधिकारियों को बदला गया।

मुख्य मंत्री रेखा गुप्ता ने भी लंबे समय तक एक ही विभाग में रहे कर्मियों के व्यवस्थित घुमाव की मांग की थी, क्योंकि कई अधिकारियों ने पाँच से अधिक वर्षों तक ‘कम्फर्ट ज़ोन’ में काम किया था। अब एलजी ने इसपर कार्रवाई की, जिससे प्रशासनिक ताजगी और जवाबदेही बढ़ेगी।

एलजी ने यह भी निर्देश दिया कि सभी संवेदनशील विभागों में तुरंत मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) की नियुक्ति की जाए और एक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की जाए, जिससे केंद्रीय सतर्कता आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित हो सके।

क्यों यह महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि लगातार वही अधिकारी एक ही विभाग में रहने से नीतियों में स्थिरता तो आती है, परन्तु नवाचार और पारदर्शिता में कमी आती है। इस घुमाव नीति से ब्यूरोक्रेसी के भीतर नई ऊर्जा आएगी और भ्रष्टाचार के जोखिम कम होंगे।

"नियमित पदांतरण से अधिकारी थकान से बचते हैं और प्रशासनिक दक्षता में सुधार होता है," एक प्रशासनिक विशेषज्ञ ने कहा।
क्या आप जानते हैं?: 1997 में स्थापित दिल्ली प्रशासनिक व्यवस्था में पहली बार ऐसी व्यापक पदांतरण नीति लागू की गई थी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  • लेफ्टिनेंट गवर्नर की दिल्ली प्रशासन में क्या भूमिका है? लेफ्टिनेंट गवर्नर दिल्ली की प्रशासनिक नीतियों की निगरानी और प्रमुख निर्णयों की मंजूरी के लिए जिम्मेदार होते हैं।
  • नयी घुमाव नीति से मौजूदा आईएएस अधिकारियों पर क्या असर पड़ेगा? अधिकांश अधिकारी अगले दो से तीन वर्षों में नई पोस्ट पर स्थानांतरित किए जाएंगे, जिससे उनके करियर में विविधता आएगी।