केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक में लाखों पीएम उज्ज्वला योजना (PMUY) लाभार्थी आर्थिक तंगी या अन्य कारणों से साल भर एक भी गैस सिलेंडर नहीं खरीद पाए।
मुख्य बिंदु
- कर्नाटक में 3.4 लाख लाभार्थियों ने 2025-26 में एक भी रिफिल नहीं लिया।
- 2021-22 की तुलना में शून्य रिफिल लेने वालों की संख्या 1.64 लाख से बढ़कर 3.4 लाख हो गई है।
- पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में यह स्थिति और भी गंभीर है, जहां क्रमशः 21 लाख और 20 लाख लाभार्थियों ने कोई रिफिल नहीं लिया।
राज्यसभा सदस्य मंसूर अली खान द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में केंद्र सरकार ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि कर्नाटक में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत करीब 3.4 लाख लाभार्थी ऐसे हैं, जिन्होंने पूरे वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान एक भी एलपीजी रिफिल नहीं खरीदा।
विस्तृत विश्लेषण के अनुसार, कर्नाटक में 2.98 लाख लाभार्थियों ने केवल एक रिफिल लिया, जबकि 3.33 लाख ने दो रिफिल लिए। हालांकि, 32.66 लाख लाभार्थी ऐसे रहे जिन्होंने तीन या उससे अधिक रिफिल का उपयोग किया। यह दर्शाता है कि जहां एक बड़ा वर्ग योजना का लाभ उठा रहा है, वहीं एक महत्वपूर्ण आबादी अभी भी इस सुविधा से वंचित है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि केवल कनेक्शन देना पर्याप्त नहीं है; असली चुनौती 'वहनीयता' (Affordability) की है। यदि गरीब परिवार सिलेंडर का खर्च नहीं उठा पाते, तो वे वापस पारंपरिक ईंधन जैसे लकड़ी और कोयले की ओर लौट जाते हैं, जो स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए हानिकारक है।
| राज्य/क्षेत्र | शून्य रिफिल (2025-26) | औसत खपत (प्रति कनेक्शन) |
|---|---|---|
| कर्नाटक | 3.4 लाख | 5.49 |
| पश्चिम बंगाल | 21 लाख | - |
| उत्तर प्रदेश | 20 लाख | - |
| राष्ट्रीय औसत | - | 4.71 |
"स्वच्छ ईंधन कनेक्शन तभी सार्थक है जब परिवार उसे नियमित रूप से खरीदने में सक्षम हो; अन्यथा यह केवल कागजी आंकड़ा बनकर रह जाता है।"
सरकार ने स्पष्ट किया है कि एलपीजी की खपत कई कारकों पर निर्भर करती है, जिसमें सिलेंडर की कीमत, परिवार का आकार, भोजन की आदतें और वैकल्पिक ईंधन की उपलब्धता शामिल है। हालांकि, सांसद मंसूर अली खान ने मांग की है कि सरकार को इस बात की गहन जांच करनी चाहिए कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर लोग रिफिल क्यों नहीं ले पा रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: कर्नाटक में शून्य रिफिल लेने वालों की संख्या में कितनी वृद्धि हुई है?
उत्तर: यह संख्या 2021-22 में 1.64 लाख थी, जो 2025-26 तक बढ़कर 3.4 लाख हो गई है।
प्रश्न 2: राष्ट्रीय स्तर पर औसत एलपीजी खपत क्या है?
उत्तर: राष्ट्रीय स्तर पर औसत खपत 2021-22 के 3.68 सिलेंडर से बढ़कर 2025-26 में 4.71 सिलेंडर प्रति कनेक्शन हो गई है।